शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण में सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह के इस्तीफे के बाद उनकी बहन हाटा तहसीलदार जया सिंह भी विवादों के घेरे में आ गई हैं। प्रशांत और जया के बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने दोनों पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने का आरोप लगाया है।
विश्वजीत ने यह भी आरोप लगाया है कि अयोध्या में तैनात रहे प्रशांत ने इस्तीफा जांच और रिकवरी से बचने के लिए दिया। इन आरोपों के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई है। हालांकि जया का कहना है कि पारिवारिक विवाद के कारण ये आरोप लगाए गए हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
मालूम हो कि मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के सरवां गांव निवासी 48 वर्षीय प्रशांत सिंह ने मंगलवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ पर लगातार टिप्पणी की है। इससे आहत होकर होकर वे अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
हालांकि इसके बाद उनके भाई ने जांच और रिकवरी के डर से इस्तीफे की बात कहते हुए मामले को नया एंगल दे दिया। उनका आरोप है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की। उसके अलावा उनकी छोटी बहन जया सिंह, जो हाटा की तहसीलदार हैं उन्होंने भी फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर ही नौकरी हासिल की है।
मामले की शासन में शिकायत की गई है, जिसके बाद जांच से बचने के लिए प्रशांत ने इस्तीफा दिया। अपने ऊपर लगे आरोप को हाटा तहसीलदार जया सिंह बेबुनियाद बता रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आरोप सुनकर वह खुद हैरान हैं। कहा कि पूरा मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।