- कुशीनगर और महराजगंज जिले के एक दर्जन गांवों की आबादी मुख्यधारा से जुड़ जाएगी।
- पुल के लिए बांध और ठोकर बनाए जाने से करीब 20 हजार एकड़ भूमि पर खेती हो सकेगी।
- कनेक्टिविटी होने से गांव में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा मिलेगी।
-गांव में आठवीं तक स्कूल हैं, इससे छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पाती है।
- बाढ़ के कारण गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर और स्टॉफ नहीं है। यहां के लोगों को तुर्कहां सीएचसी पर आकर उपचार कराना पड़ता है।
- गन्ने की फसल को खड्डा चीनी मिल तक पहुंचाने, गांव में निर्माण कार्य के लिए गिट्टी और बालू सहित अन्य सामान ले जाने में तीन गुना किराया खर्च करना पड़ता है।
- चार माह गुजारा करने के लिए लोगों को प्रशासन के कम्युनिटी किचन के भरोसे रहना पड़ता है।
- रसोई गैस, डीजल और पेट्रोल के अभाव में लोगों की खेतीबाड़ी और परिवहन का काम प्रभावित होता है।
- बरसात की वजह से नववधुएं चार माह तक अपने मायके में रहती हैं। दैनिक क्रिया में लोगों को काफी दिक्कत होती है। पुल बनाए जाने के बाद गांव में बाढ़ का पानी नहीं जाएगा।
- पुल के लिए बांध और एप्रोच, ठोकर बनाए जाने से वीटीआर और सोहगीबरवा के जंगली जानवर भी बाढ़ से प्रभावित नहीं होंगे।
- यहां बिजली की सुविधा नहीं है। गांव के लोग जुगाड़ से मोबाइल चार्ज करते हैं। सोलर लालटेन से लोगों के घरों में रोशनी होती है।
पक्का पुल निर्माण के संबंध में मुख्यमंत्री ने वादा किया है। पांच किमी लंबा पुल बनाने के लिए 47383.98 लाख रुपये का डीपीआर 16 मार्च को ही शासन को भेज दिया गया है। इसके बारे में बुधवार को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान से बात हुई है। पुल बनने से खड्डा क्षेत्र का विकास होगा। पुल से होकर वीटीआर और नेपाल जाने के लिए नए रास्ते का विकल्प खुल जाएगा। -विवेकानंद पांडेय, विधायक, खड्डा।
बाढ़ के पानी से पूरा इलाका तबाह रहता है। मई से नवंबर तक पीपा पुल लगता है। इसके बाद उसे हटा दिया जाता है। बरसात के दिनों में चार माह किस तरह से गुजरता है। इसका दर्द सिर्फ हम लोग महसूस कर पाते हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा से पूरे क्षेत्र में उत्साह है। -प्रमोद राय, किसान
गंडक पर पुल बनने से पूरे क्षेत्र का विकास होगा। खड्डा से लोग सीधे जुड़ जाएंगे। महराजगंज के सोहगीबरवा सहित अन्य गांवों को कुशीनगर से जोड़ा जा सकेगा। इससे गांवों का विकास होगा। -संग्राम सिंह यादव, अध्यक्ष, प्रधान संघ खड्डा।
बरसात के पहले पीपा पुल हट जाएगा। इसके बाद नाव से ही लोग नदी पार करेंगे। पहले नदी पार करने में सुबह से शाम हो जाती थी। अब नाव पर मोटर लगाया गया है जिससे एक घंटे लगता है।-भोला, नाविक, भैंसहा निवासी।
नाव डूबने से तीन लोगों की हुई थी मौत
13 अप्रैल 2022 को गंडक नदी से निकली शाखा (सोता) पार करने में छोटी नाव डूब गई थी। दुर्घटना में तीन महिलाओं की मौत हो गई थी। अन्य लोगों की जान किसी तरह से बचाई जा सकी। सभी ग्रामीण फसल काटने जाने के लिए लंबी दूरी तय करने के बजाय नाव से नदी का सोता पार करके सालिकपुर जा रहे थे, तभी नाव डूब गई। लोगों का कहना है बाढ़ के दिनों में पांच किलोमीटर से अधिक दूरी नाव से तय करनी पड़ती है। ऐसे में हरदम जोखिम बना रहता है।
कुशीनगर डीएम रमेश रंजन ने कहा कि गंडक नदी पर पक्का पुल बनाने के संबंध में मुख्यमंत्री के निर्देशानुुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसका डीपीआर शासन को भेजा गया है। डीपीआर को स्वीकृति मिलने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इस काम को जल्द पूरा कराया जाएगा।