संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। जब तक देश में जातियां रहेंगी, तब तक देश को सशक्त राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने जातिविहीन समाज की कल्पना की थी, ताकि समाज निर्माण में लोगों का समान योगदान हो सके।
ये बातें पूर्व एमएलसी धर्मप्रकाश भारतीय बौद्ध ने कहीं। वह सोमवार को कुशीनगर स्थित म्यांमार बुद्ध मंदिर के भिक्षु चंद्रमणि सभागार में राष्ट्रीय बौद्ध महासभा उत्तर प्रदेश की तरफ से चल रहे त्रिदिवसीय पदाधिकारी प्रशिक्षण शिविर के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र है। इसमें सभी धर्मों का सम्मान समान रूप से होना चाहिए। समापन कार्यक्रम को अशोक शाक्य, अशोक दोहरे, वीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अटल सिंह यादव, डॉ. सुधीर कुमार, हरीश कुमार सत्यार्थी, हरभजन सिंह बौद्ध, डॉ. बीआर बौद्ध, गुलशन कुमार, विजयपाल सिंह, रामसनेही दीवान आदि ने संबोधित किया।
इसके बाद तीन सितंबर को पेरियार ललई सिंह यादव की जयंती मनाने का निर्णय कर राजाराम आनंद की लिखी पुस्तक सामाजिक-आर्थिक विषमता : कारण व निवारण का विमोचन किया गया।
संचालन सुशील कुमार निगम और दशरथ मौर्य ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान भिक्षु गरिमानंद, ब्रजेश कुमार, चक्खन सिंह जाटव, सुरजेश कुमार सागर, गुलशन कुमार बौद्ध, शशि कुमारी बौद्ध , अमर सिंह गौतम, बौबी भारतीय बौद्ध आदि मौजूद रहे।