कसया। त्रिवेणी चीनी मिल रामकोला के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को वैज्ञानिकों के साथ भरवलिया महुई में 238 प्रजाति के गन्ने में लग रहे रोग (लाल सड़न रोग) को देखा। विगत वर्षों से किसानों को इस गन्ने की बुआई से काफी नुकसान पहुंच रहा है। गन्ने में लगे रोग को दिखाते हुए डाॅ. एसके पांडेय करनाल ने कहा कि गन्ना की पत्ती की निचली सतह पर मध्य सिरे पर मनके की माला की तरह संरचना दिखाई देती है जो, बाद में पूरी तरह लाल होकर अंदर से सूख जाती है। यह रोग पानी-हवा से फैलने वाला है। किसानों को खेत में अगर यह लक्षण दिखाई दे तो गन्ने को खेत से उखाड़ कर फेक दें और मिल की ओर से निशुल्क ब्लीचिंग पाउडर को उस जगह पर डालें। इस अवसर पर प्रधान प्रबंधक यशराज सिंह, वरिष्ठ गन्ना प्रबंधक संजीव बलियान, डाॅ.एस के त्रिपाठी, विकास मौजूद रहे।