संवाद न्यूज एजेंसी
पकवा इनार। महात्मा बुद्ध की महा परिनिर्वाण स्थली पर रविवार को सूर्योदय के साथ ही विदेशी पर्यटकों का दलों का हुजूम उमड़ पड़ा। यह सिलसिला सूर्यास्त तक चलता रहा। इससे प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। इसमें श्रीलंका, वियतनाम, थाईलैंड, नेपाल और यूरोप महाद्वीप के देशों के पर्यटकों का विशिष्ट दल शामिल रहा।
दोपहर बाद 1:30 बजे यूरोपीय पर्यटकों का 26 सदस्यीय दल बनारस व सारनाथ से सड़क मार्ग से कुशीनगर पहुंचा। उन्होंने सर्वप्रथम मांथा कुंवर मंदिर में बुद्ध की भू स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा का दर्शन किया। यहां से पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के व्याख्या केंद्र के रास्ते मुख्य महा परिनिर्वाण मंदिर में पाथवे के जरिये पहुंचे। बुद्ध वंदना के साथ छठवीं शताब्दी प्राचीन बुद्ध की लेटी स्वर्ण आभायुक्त प्रतिमा की परिक्रमा की। प्रतिमा की भव्यता, विशिष्टता के अलावा ऐतिहासिकता से परिचित हुए। दल सोमवार को बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी नेपाल के लिए रवाना होगी। यहां पर कपिलवस्तु व भैरहवा से काठमांडू और फिर दिल्ली चली जाएगी। यह दल 11 अक्तूबर को दिल्ली पहुंचा था। वहां से भ्रमण करते हुए सारनाथ से कुशीनगर पहुंचा। इनकी पूरी यात्रा 13 दिवसीय है।