कसया। दिवंगत गीतकार साहिर लुधियानवी की 34वीं पुण्यतिथि पर कुशीनगर स्थित बुद्ध मंदिर परिसर में यूथ संगठन डिवोटेड फॉर नेशन की ओर से शनिवार को दिन में 11 बजे से साहिर मुक्ति दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने साहिर के जीवन पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अध्यक्ष अंशुमान पांडेय ने कहा कि साहिर लुधियानवी पहले ऐसे गीतकार थे, जिनकी रचनाओं में तत्कालीन समस्याओं और आम आदमी की दयनीय स्थिति का चित्रण मिलता था। फिल्मों में गाए गए उनके गीत दर्शकों के दिलों को छू लेते थे। पांडेय ने कहा कि साहिर का जन्म आठ मार्च 1921 को लुधियाना शहर के एक जमींदार परिवार में हुआ और देहावसान 25 अक्टूबर 1980 को मुंबई में हुआ। उपाध्यक्ष चंदनराज ने कहा कि मजहबी हिंसा के घोर विरोधी रहे साहिर लुधियानवी ने जीवन भर गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए अपनी रचनाओं को बुलंद करते रहे। उनकी रगों में बहने वाला खून किसी जाति या धर्म का नहीं बल्कि इंसानियत का संदेश देता था। प्रवक्ता प्रिंस पांडेय ने साहिर की लिखी नज्म- ऐ रहबर मुल्क-ओ-कौम बता, ये किसका लहू है कौन मरा.... सुनकर संगोष्ठी में मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इस मौके पर योगेश पांडेय, अजीत महाकश्यप, ज्ञानू शुक्ला, पप्पू पाल मौजूद रहे।