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बिजली मिस्त्रियों की मौत पर सिर्फ आश्वासन

Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
Kushinagar
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रामकोला। करंट की चपेट में आकर आए दिन लोग या तो गंभीर रूप से झुलस जा रहे हैं, अथवा उनकी मौत हो जा रही है। मरने वालों में खुद बिजली मिस्त्री अथवा बिजली विभाग के संविदाकर्मी भी हैं। इन घटनाआें में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए लोग आवाज तो उठाते हैं, लेकिन आश्वासन देकर उन्हें चुप कर दिया जाता है। बार-बार हो रहे इन हादसों के लिए बिजली विभाग के लोग अपनी लापरवाही और जवाबदेही से बचते हैं। इसी वर्ष 22 जून को फाल्ट ठीक करते समय रामकोला थानाक्षेत्र के पगार छपरा गांव के निवासी अमेरिका नाम के बिजली मिस्त्री करंट की चपेट में आ गए थे। वह कोटवा में फाल्ट ठीक करने गए थे। मरम्मत के दौरान ही करंट आ गया और गंभीर रूप से झुलस गए। कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। नौ जून की देर रात बरवा राजापाकड़ चौराहे के पास स्थित एक पोल पर चढ़कर फाल्ट ठीक करते समय दुमही गांव के बिजली मिस्त्री गंभीर रूप से झुलस गए थे। रामईश्वर कुशवाहा नाम के यह बिजली मिस्त्री विभाग में संविदा पर तैनात थे। घटना के विरोध में 10 अक्टूबर को दुमही और बंगरा गांव के लोगों ने गुरवलिया विद्युत उपकेंद्र के पास कसया-तुर्कपट्टी मार्ग जाम कर प्रदर्शन किया था। इसी रात रामईश्वर की मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार को एक बार पुन: ऐसा ही हादसा हुआ। कप्तानगंज के डीसीएफ चौक निवासी मनोज की ट्रांसफॉर्मर का फाल्ट ठीक करते वक्त मौत हो गई। बार-बार इस तरह के हादसे हो रहे हैं। लोगों के झुलसने या मौत का सिलसिला बरकरार है लेकिन इसके लिए असल दोषी कौन है।
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