साल 2019-20 में तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय व पूर्ण बोरा ने महात्मा बुद्ध के जीवन संबंधी घटनाओं, प्राकृतिक दृश्य व सामाजिक जागरूकता से जुड़े चित्रों को बुद्ध पीजी कॉलेज, बुद्ध इंटर कॉलेज व राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर के दीवारों पर पेंटिंग कराई थी। जिसमें टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी व जन सहयोग से आकर्षक बनाया था। उनके बाद इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने ख्याल नहीं रखा है। इसका नतीजा है कि जगह-जगह चित्रकारी की तस्वीरें या तो धुंधली पड़ गई हैं या दीवार के प्लास्टर के क्षतिग्रस्त होने से स्वरूप बिगड़ रहा है। जिससे आकर्षण कम हो रहा है, लेकिन कोई इसका ध्यान नहीं दे रहा है।
सूख रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के रोपित पेड़
तहसील प्रशासन ने कुशीनगर को ग्रीन व क्लीन वातावरण देने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कार्य किया था। उचित देखभाल के अभाव में कुछ सूख रहे हैं। कुछ पूरी तरह सूख चुके हैं। इसे फिर से नए पौधे रोपित करने उन्हें संरक्षित कर बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने इन पौधों का रोपण कुशीनगर में ग्रीन जोन तैयार करने के मकसद से आरंभ किया था। जिसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसका परिणाम है कि अब लगे पौध स्थल कुछ समय में खाली दिखेंगे। हरियाली से सुंदरीकरण का सपना धरातल पर नहीं उतर पाएगा।
2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन विभाग की करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का मैत्रेय शिलान्यास स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में की थी। उनमें कुशीनगर में पर्यटन विभाग की तरफ से लाखों रुपये की लागत से तीन उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कार्य किया गया। इनमें एक शौचालय राही कुटीर पर्यटक आवास गृह के अंदर बनाया गया है। इसकी सार्वजनिकता पर ही सवाल है। शौचालय तक पहुंचने में दिक्कतें हैं।
दूसरा उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय बुद्धा पार्किंग में बना है। इसका भी हालात ठीक नहीं है। पुरुष शौचालय बंद रहता है। महिला शौचालय खुला रहता है। इसके अलावा तीसरा उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय इंपीरियल होटल के सामने बना है, पानी आपूर्ति, दरवाजा टूटा, उगी झाड़ झंखाड़ है। जबकि पर्यटन विभाग उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालयों को नगरपालिका परिषद कुशीनगर को हैंडओवर कर चुका है। इसके बावजूद शौचालयों की स्थिति बदहाल है।
कुशीनगर नगरपालिका परिषद ईओ संतोष कुमार ने कहा कि उच्च स्तरीय सार्वजनिक शौचालय की निगरानी की जाती है। साफ-सफाई से लेकर हर तरह की व्यवस्था मुक्कमल की गई है। कमी की जानकारी होने पर बेहतर कराने का काम किया जाता है।