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Kushinagar News: 38 उद्योगों के प्रस्ताव हुए निरस्त, नहीं उतरे मानकों पर खरे

Sun, 04 Jun 2023 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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जिला उद्योग कार्यालय के परिसर में लग रहा ग्लास हाउस का प्लांट। संवाद
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शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और पशुपालन जैसे उद्योगों के लिए किए गए आवेदन हुए हैं निरस्त
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फोटो है।
फरवरी में पडरौना शहर में हुआ था ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट
3573.37 करोड़ रुपये का 238 उद्यमियों ने दिया था प्रस्ताव
बिजली, जमीन और बैंक से ऋण न मिलने की समस्या बन रही रोड़ा
200 उद्यमियों की फैक्ट्रियां चालू होने से 21,606 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायियों की तरफ से प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों में 38 निरस्त कर दिए गए हैं। उन प्रस्तावों की उपयोगिता उद्योग के लिहाज से नहीं पाई गई है। इसके अलावा जिन लोगों ने फैक्ट्रियां लगाने के लिए प्रस्ताव दिए भी हैं, उनमें भी अधिकतर के सामने जमीन का संकट उत्पन्न हो गया है। जमीन न मिलने के कारण बैंक से ऋण लेने की औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। यही नहीं बिजली की कमी भी बड़ी समस्या उभरकर सामने आ रही है। फैक्ट्रियां लगाने के लिए निवेश करने के इच्छुक कुछ उद्यमियों ने विभाग में प्रार्थनापत्र देकर अपनी इन समस्याओं से अवगत भी कराया है।
इस साल दस, 11 और 12 फरवरी को पडरौना शहर में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था। इसमें 238 उद्यमियों ने 3,573,37 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। इससे जिले के 21,606 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई थी। इस ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में मिले प्रस्तावों का विभागीय स्तर पर सत्यापन कराया गया तो उनमें 38 प्रस्ताव स्वीकार करने योग्य नहीं थे। इसलिए उन्हें निरस्त कर दिया गया है। अब 200 उद्यमियों का ही समझौता पत्र रह गया है, जो उद्योग धंधे या फैक्ट्रियां लगा सकते हैं।
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ये प्रस्ताव हुए हैं निरस्त
पशुपालन विभाग के सात, बेसिक शिक्षा विभाग के चार, आबकारी विभाग के दो, चिकित्सा शिक्षा विभाग के दो, फूड एंड सिविल सिविल सप्लाई के नौ और विद्युत निगम से संबंधित एक प्रस्ताव था, जिसे सत्यापन के बाद निरस्त कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि इन प्रस्तावों में पेट्रोलपंप, विद्यालय और पशुपालन से संबंधित प्रस्ताव थे। विभाग ने इन्हें उद्योग की श्रेणी में न मानते हुए निरस्त कर दिया।

बिजली और जमीन की समस्या बनी रोड़ा
जिन व्यवसायियों ने प्रस्ताव दिया और फैक्ट्रियां लगाने के इच्छुक हैं, उनके सामने बिजली और जमीन बड़ी समस्या बनी हुई है। क्योंकि जहां उद्योग लगाना चाहते हैं, वहां दो फेज की लाइन ही उपलब्ध है। बिजली भी ग्रामीण क्षेत्र की मिलती है, जबकि बिजली 24 घंटे जरूरी है। यह समस्या सबसे अधिक हाटा और कप्तानगंज में सामने आई थी। इसके अलावा अधिकतर व्यवसायियों के सामने जमीन का संकट भी बना हुआ है। उन्हें जमीन नहीं मिल रही है या धारा 80 के तहत नामांतरण की प्रक्रिया में बहुत समय लग रहा है।

बैंक से ऋण मिलने में भी आ रही समस्या
जमीन सहित अन्य प्रकार के दस्तावेज पूरे न हो पाने के कारण बैंकों से ऋण भी मिलने में देरी हो रही है। इसके चलते उद्योग-धंधे लगाने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। व्यवसायी संबंधित विभाग से लेकर बैंक तक चक्कर लगा रहे हैं।

इन व्यवसायियों के सामने बिजली की समस्या
उद्योग विभाग के मुताबिक, पडरौना के एक होटल व्यवसायी विशाल गुप्ता जंगल खिरकिया के पास बाॅटलिंग प्लांट के लिए समझौता पत्र जमा किए थे। उन्होंने बताया था कि अपने निजी ब्रांड का पानी पैक कर बेचेंगे, लेकिन बिजली 18 घंटे भी नहीं मिल पाती। ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति होने के कारण उद्योग लगाना मुश्किल हो रहा है। अलग से बिजली कनेक्शन लेने पर खर्च अधिक बढ़ जाएगा।

- ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में समझौता पत्र जमा करने वाली गीता गुप्ता पत्नी संजय गुप्ता समउर बाजार में नमकीन और चिप्स की फैक्ट्री लगाना चाहती हैं। उन्होंने उद्योग विभाग को बताया है कि बिजली समस्या है। एक तो बिजली बहुत कम मिलती है, दूसरे वोल्टेज की समस्या भी रहती है।

ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में उद्योग के लिए प्रमुख रूप से किस विभाग के कितने और कितनी धनराशि के प्रस्ताव आए (धनराशि करोड़ रुपये में)
कृषि विभाग का एक- 2.51
पशुपालन के 80-82.80
बेसिक शिक्षा विभाग के आठ- 14.25
गन्ना विभाग एवं चीनी मिल इंडस्ट्रीज विभाग के तीन- 5.2
सहकारिता विभाग के दो- 1201.5
दुग्ध विकास विभाग के दस-202.00
बिजली निगम के अतिरिक्त सोर्सेज वाले विभाग के तीन-96.5
आबकारी विभाग के सात-477.00
एमएसएमई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन के 35-233.21
मत्स्य पालन के तीन-13.00
उद्यान विभाग के 18-45.00
पर्यटन विभाग के 16-197.00

ये हैं नियम-
1. उद्यम स्थापित करने के लिए उद्यमी के पास कम से कम दस प्रतिशत पूंजी होनी चाहिए।
2. उद्यमी के पास व्यावसायिक जमीन होनी चाहिए। जमीन के आधार पर ही बैंक से ऋण मिलता है।
3. प्रोजेक्ट तैयार करने के बाद बैंक जमीन की कीमत के 70 फीसदी तक ऋण देता है।
4. पूंजी के अनुपात में बैंक की ओर से 20 फीसदी या अधिकतम चार करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है।
5. महिला उद्यमी को सात प्रतिशत तो पुरुष उद्यमियों को ब्याज पर पांच लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है।

ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए छह व्यवसायी चयनित
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी अगस्त में होना प्रस्तावित है। जनपद के 238 निवेशकों में से 38 के रिजेक्ट होने के बाद 200 बचे हैं। इनमें से उद्योग विभाग से जुड़े छह निवेशकों का चयन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए किया गया है। उद्योग लगाने के लिए इनमें एक को उद्योग विभाग की जमीन मिली है, जबकि अन्य पांच को निजी जमीन पर उद्योग लगाना है। इनमें इंद्रजीत सिंह, बैरिस्टर प्रसाद जायसवाल, राजकुमार, राजेश छपारिया, कुमारी गीता और अमित अग्रवाल के नाम शामिल हैं।

वर्जन-
जनपद के 238 निवेशकों ने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में 3573.37 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया था। सत्यापन में 38 के प्रस्ताव रिजेक्ट हो गए हैं। उद्योग-धंधे लगाने में किन्हीं-किन्हीं मामलों में बिजली, जमीन और बैंक से ऋण की समस्या आड़े आ रही है। अगस्त में इस जनपद में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी होनी है, जिसके लिए छह उद्यमियों का चयन किया गया है। उद्योगों को जमीन पर उतारने की पूरी कोशिश की जाएगी।
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-सतीश कुमार, उपायुक्त, उद्योग

उद्योगों को स्थापित करने में हाटा और कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में बिजली समस्या सामने आई थी। इसमें संबंधित एसडीओ और एक्सईएन की लापरवाही सामने आई थी, जिसे लेकर विद्युतकर्मियों को स्ट्राइक की थी। उसके बाद एसडीओ का निलंबन किया गया था तथा एक्सईएन को हटाया गया। अब वहां की समस्या दूर हो गई है। जिनके कागजात पूर्ण नहीं होंगे, बैंक से ऋण मिलने में समस्या तो आएगी ही।
-रमेश रंजन, डीएम
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