कसया (कुशीनगर)। शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के तहत राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर में मंगलवार की सुबह 10 बजे से सिक्कों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इस दौरान प्राचीन सिक्कों के बारे में जानकारी भी दी गई। संग्रहालय के अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने बताया कि प्राचीन सिक्के राष्ट्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हैं। इनकी सम्यक सुरक्षा एवं भावी पीढ़ी के लिए इन्हें संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। सिक्के देश के इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश डालते हैं। ये इतिहास निर्माण का एक प्रमुख तथा प्रमाणिक साधन हैं। उन्होंने सिक्कों के संरक्षण के प्रति जागरुकता उत्पन्न करने तथा सिक्कों के निर्माण की परंपरा, निर्माण की तकनीक से परिचय व प्रमुख राजवंशों के सिक्कों के बारे में क्रमबद्ध रूप से लोगों को परिचित कराना संग्रहालय का कार्य है। इसी के तहत संग्रहालय में सिक्कों की कहानी-चित्रों की जुबानी विषयक छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में विनिमय के आरंभिक स्वरूपों, सिक्कों के प्रारंभिक रूप, सिक्कों के प्रकार और उनके निर्माण की तकनीक को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। प्रदर्शनी में छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में हिन्द यवन सिक्कों, कुषाण व गुप्त राजाओं के सोने, चांदी तथा ताम्र सिक्कों, सातवाहन व अन्य दक्षिण भारतीय राजवंशों के सिक्कों के छायाचित्रों, उत्तर गुप्त कालीन राजवंशों के सिक्कों के चित्र, मध्यकालीन सिक्कों के चित्र, सूरी व मुगल कालीन सिक्कों के चित्र, प्रांतीय शासकों के सिक्कों के चित्र, ब्रिटिश सिक्कों के चित्र तथा आधुनिक सिक्कों के अंतर्गत आना व नया पैसा सीरीज के सिक्कों के चित्रों को रोचक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी 31 जुलाई तक प्रत्येक कार्य दिवस में लोगों को देखने के लिए खुली रहेगी।