पडरौना। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर सोमवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पर्यटकों व सैलानियों की आवक से गुलजार रही। आए पर्यटकों ने प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया और विशेष पूजा-अर्चना कर विश्व कल्याण व शांति की कामना की। इसके बाद बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) के लिए रवाना हो गए।मालूम हो कि कुशीनगर में पर्यटन सीजन 27 सितंबर विश्व पर्यटन दिवस से शुरू होता है, जो 31 मार्च तक चलता है। इस दौरान देश-विदेश के पर्यटकों की आवक अधिक रहती है। इस क्रम में सोमवार की सुबह 7:0 बजे श्रीलंका के 43 और 19 सदस्यीय दल व्याख्या केंद्र के रास्ते मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचा,लेटी 6.1 मीटर लंबी प्रतिमा पर बुद्ध वंदना के साथ चीवर चढ़ाया। इसके बाद थाईलैंड के 16 व चार, कंबोडिया के 99, वियतनाम के तीन, जापान के आठ व म्यांमार के 16 पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों ने पहुंचकर बुद्ध प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया और लेटी प्रतिमा पर चीवर चढ़ाए। यहां से बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप और भू-स्पर्श मुद्रा में बुद्ध प्रतिमा का दर्शन मांथा कुंवर मंदिर में किए। दर्शन के बाद बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी के लिए रवाना हो गए।