कई दिनों से था बुखार, जिला अस्पताल की जांच में हुई पुष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। डेंगू और एईएस, जेई के मरीज मिलने के बाद भी मलेरिया विभाग गंभीर नहीं है। एक सप्ताह के अंदर दो डेंगू के मरीज मिल चुके हैं, लेकिन इसकी जानकारी मलेरिया विभाग के जिम्मेदारों को नहीं है। अभी तक टीम भी डेंगू से पीड़ित घरों तक नहीं पहुंच सकी है। इससे जिम्मेदारों की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले में चल रहा दस्तक अभियान आंकड़ों की भेंट चढ़ गया है। जेई, एईएस और डेंगू के मरीज मिलने के बाद भी गांव में टीम नहीं पहुंच सकी। मलेरिया विभाग के जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं।
भिस्वा सरकारी गांव के निवासी विनोद राय के बेटे अनुराग की तबीयत कई दिनों से खराब थी। घरवाले 20 जुलाई को जिला अस्पताल में जांच कराई तो डेंगू निकला। लमकन गांव के मुरारी के बेटे अभिजीत की जांच 26 जुलाई को हुई तो डेंगू की पुष्टि हुई। इसके अलावा इसी महीने में डेंगू के 14 संदिग्ध मरीज मिले हैं।
इनका सैंपल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज लैब में जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा जिगना गांव में रिजवान की तीन वर्षीय बेटी उमेरा एईएस की चपेट में आ गई है। उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। सोहनरिया गांव निवासी संतोष राजभर की आठ वर्षीय बेटी चांदनी को जेई हो गया था। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। इन दिनों घर पर है।
मलेरिया विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से अभी तक जिले में 29 एईएस, 28 जेई और तीन डेंगू के मरीज मिले हैं। हालांकि, जिला अस्पताल की पैथाेलॉजी में हुई जांच रिपोर्ट के अनुसार दस दिनों में एक कालाजार, दो डेंगू और एईएस, जेई के भी मरीज मिले हैं।
लापरवाही बरत रहा विभाग
अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी मलेेरिया विभाग में तैनात सात मलेरिया इंस्पेक्टरों की है, जो गैर विभागीय कर्मचारियों से तालमेल बनाकर लोगों को जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करेंगे। लेकिन ऐसा जिले में नहीं हो रहा है। मलेरिया इंस्पेक्टर फील्ड में जाने से कतरा रहे हैं।
जिगना गांव में पहुंची टीम, लिया ब्लड सैंपल
जिगना गांव में एईएस पीड़ित उमेरा के घर मलेरिया इंस्पेक्टर सोेनम तिवारी के नेतृत्व में टीम पहुंची। टीम ने गांववालों को जलजनित बीमारियों से बचाव का तरीका बताया। सोनम तिवारी ने बताया कि गांव में क्लोरीन की गोली बांटी गई है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव घरों के आसपास किया गया। परिवार के अलावा गांव के बीस से अधिक लोगों का ब्लड सैंपल जांच के लिए लिया गया। एंटी लार्वा का भी छिड़काव हुआ।
डेंगू के चार वायरस होते हैं
डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4, जब यह पहले से संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है और बीमारी तब फैलती है जब वह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। वायरस व्यक्ति के रक्तप्रवाह के जरिए फैलता है। एक बार जब कोई व्यक्ति डेंगू बुखार से उबर जाता है तो वह विशिष्ट वायरस से प्रतिरक्षित होता है, लेकिन अन्य तीन प्रकार के वायरस से नहीं। यदि आप दूसरी, तीसरी या चौथी बार संक्रमित होते हैं तो गंभीर डेंगू बुखार, जिसे डेंगू रक्तस्रावी बुखार के रूप में भी जाना जाता है, के विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
सिर में अधिक या लगातार दर्द होना।
मांसपेशियां, हड्डियों, जोड़ों में दर्द रहना।
हर समय इंसान का जी मिचलाते रहना।
बुखार के समय उल्टी आना।
आंखों के पीछे दर्द होना।
ग्रंथियों में सूजन आना।
त्वचा पर लाल चकत्ते होना।
तीन तरह का होता है डेंगू का बुखारहल्का
डेंगू बुखार : इसके लक्षण मच्छर के काटने के एक हफ्ते बाद देखने को मिलते हैं।
डेंगू रक्तस्त्रावी बुखार : इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे कुछ दिनों में गंभीर हो जाते हैं।
डेंगू शाक सिंड्रोम : यह डेंगू का सबसे खतरनाक गंभीर रूप हैं। यहां तक कि यह मौत का कारण बन जाता है।
इस तरह से करें बचाव
पूरी बाजू के कपड़े पहनें। जूते मौजे के साथ पहने।
अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
बासी भोजन कतई न करें।
दूषित पानी बिलकुल न पीएं।
वर्जन
दस्तक अभियान चल रहा है। सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है और फील्ड में भी जा रहे हैं। डेंगू के मरीजों को मिलने की जानकारी नहीं है। पता लगाने के बाद मलेरिया इंस्पेक्टर को गांव पर भेजा जाएगा। छिड़काव और बचाव का तरीका बताया जाएगा।
-आरके गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी