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दहेज हत्या के दोषी को 14 साल का सश्रम कारावास

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दहेज हत्या के दोषी को 14 साल का सश्रम कारावास
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो ने सुनाई सजा
पडरौना। दहेज हत्या का दोष सिद्ध होने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो महिला के पति को 14 साल के सश्रम कारावास, सास और ससुर को 10-10 साल के सश्रम कारावास से दंडित किया। शुक्रवार को पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने सजा सुनाई। कोर्ट के आदेश पर दोषियों को जेल भेज दिया गया।
कोर्ट में वादी प्रभुनाथ का पक्ष सहायक शासकीय अधिवक्ता ने कृष्ण कुमार पांडेय ने कोर्ट के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि प्रभुनाथ की बहन विमला देवी की शादी 25 अप्रैल 2008 को सत्य प्रकाश राय पुत्र महिमा राय निवासी बनरहा, पश्चिम पट्टी संग हुई थी। शादी के बाद से ही दहेज को लेकर विमला के ससुर महिला राय, सास सुगंधी देवी, देवर शिव प्रकाश राय उर्फ शिवम और ननद अलका उर्फ गुड्डन बार-बार प्रताड़ित करने लगे।
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दहेज में कार लाने की मांग को लेकर ससुराल उत्पीड़न होने की बात विमला ने अपने भाई प्रभुनाथ को बताई। तब एक पट्टीदार परमहंस कुंवर ने इस मामले में दोनों पक्षों में समझौता कराया। 16 अप्रैल 2012 को पट्टीदार ने प्रभुनाथ को फोन करके बताया कि उनकी बहन विमला की मौत हो गई है।
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ससुरालियों ने उसके शव को जला दिया है। इस मामले में प्रभुनाथ ने बहन की दहेज के लिए हत्या करने, हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने का मुकदमा सेवरही थाना में दर्ज कराया। विवेचना के बाद पुलिस ने विमला के पति सत्य प्रकाश उर्फ सत्यम राय, ससुर महिमा राय और सास सुंगधी देवी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। शुक्रवार को मामले का विचारण करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो श्याम मोहन जायसवाल ने दोषियों को दंडित किया। उन्होंने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला किया।
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