महाराष्ट्र से आयोध्या के लिए पैदल निकले रामभक्त। संवाद
महाराष्ट्र से चलकर अयोध्या के लिए पैदल चल रहा कार सेवक की अगुवाई में जत्था शुक्रवार को कौशाम्बी पहुंचा। यात्रा में शामिल राम भक्तों का जगह-जगह पर स्वागत हुआ। दल की अगुवाई कर रहे कार सेवक कन्हैया प्रसाद केसरी का कहना है कि एक दौर था जब अयोध्या तक पहुंचने पर लाठी मिली, आज फूल बरसाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र के मीरा भयंदर निवासी कन्हैया प्रसाद केसरी ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया था। उत्तर प्रदेश में पुलिस से बचते-बचाते किसी तरह अयोध्या पहुंचे। सरयू नदीं के पुल पर बिखरी चप्पल को देख रूह कांप गई। वह वापस तो लौट गए लेकिन मन में विश्वास था कि एक दिन रामलला का अयोध्या में ही दर्शन करेंगे। अब मनोकामका पूरी हुई।
कन्हैया प्रसाद का कहना है कि 10 दिसंबर को वह पैदल ही साथियों के साथ निकले। मकसद था कि जिस रास्ते में प्रभु राम निकले थे वहां की रज (धूल) माथे पर लगाकर कारवां बढ़ता जा रहा है। उनकी यात्रा को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हरी झंडी दिखाने के साथ ही शुभकामना देकर रवाना किया।
उत्तर प्रदेश में जिस तरह से लोग फूल बरसा रहें हैं उससे वह दर्द भूल गया जो कारसेवा के दौरान मिला था। कन्हैया प्रसाद के साथ मनोज यादव, शुभम यादव, राजकुमार यादव, कन्हैया प्रसाद केसरी ,स्वारथ नाथ पांडेय, चंदन यादव, उमाशंकर यादव ,रामपाल यादव, अनिल चौहान, रमेश पाल ,संतोष यादव, विवेक मौर्य शामिल हैं। 21 जनवरी को उन्होंने अयोध्या पहुंचने का संकल्प लिया है।