मंझनपुर में ओसा रोड स्थित एक निजी हॉस्पिटल में शुक्रवार को महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। लोगों का गुस्सा देख डॉक्टर और कर्मचारी भाग निकले। इससे आक्रोशित हुए लोगों ने पास में स्थित एक अन्य अस्पताल के कर्मचारी की पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हालांकि, बाद में महिला की मौत के मामले में दोनों पक्षों ने सुलह कर ली। पुलिस को मारपीट के मामले में तहरीर दी गई है।
कोखराज के टिकरी भरवारी निवासी अनीता देवी (40) पत्नी बिद्धन का 23 अगस्त को ओसा रोड एक निजी अस्पताल में बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। बिद्धन का आरोप है कि हालत बिगड़ने पर उनके मरीज को वाराणसी के एक अस्पताल भेज दिया गया था। वहां पर भी सही से उपचार नहीं हुआ।
बृहस्पतिवार को पत्नी को फिर मंझनपुर लाए और उसी अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां पर शुक्रवार की सुबह उसकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला की मौत के बाद तीमारदार इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे, जिस पर डॉक्टर व कर्मचारी भाग खड़े हुए। कुछ लोग सामने स्थित एक अन्य निजी अस्पताल पहुंचे।
इसी अस्पताल की ओटी में महिला का ऑपरेशन हुआ था। लोगों ने अस्पताल के कर्मचारी जितेंद्र कुमार निवासी कोर्रों की जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह दृश्य कैद हो गया। घायल को एक अन्य निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अनीता देवी के परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर सूचना दी। तब पुलिस आई। हालांकि, बाद में महिला की मौत के मामले में तीमारदार व अस्पताल संचालक ने सुलह कर ली। लेकिन, घायल जितेंद्र के पिता विश्राम प्रजापति ने कोतवाली में तहरीर देते हुए एफआईआर दर्ज कर हमलावरों पर कार्रवाई की मांग की है।
तो क्या एक ही नाम से चल रहे दो अस्पताल
जिस निजी हॉस्पिटल में महिला की मौत हुई वह तीन मंजिला इमारत में संचालित है। भूतल पर न्यू शांति हॉस्पिटल का बोर्ड लगा है। यहां पूरा अस्पताल चल रहा है। इसके अलावा कुछ बेड व एक डॉक्टर कक्ष पहली मंजिल पर भी बने हैं। घटना के बाद तीमारदार व मीडिया भूतल में संचलित अस्पताल पहुंचे। यहां संचालक अजय सिंह व संजीत सिंह मिले।
बताया कि न्यू शांति हॉस्पिटल को उन्होंने किराए पर ले रखा है। प्रथम तल वाले अस्पताल से उनका या उनके अस्पताल के नाम से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अपने अस्पताल के नाम का दवा का पर्चा भी दिखाया। ठीक इसी नाम के अस्पताल के दवा के पर्चे का एक पैड प्रथम तल के डॉक्टर कक्ष में भी मिला। खास बात यह है कि दोनों में पंजीकरण नंबर अलग-अलग थे।
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ऑपरेशन के बाद महिला करीब 10 दिन भर्ती थी। स्वस्थ हालत में उसे छुट्टी दी गई थी। बाद में वह ब्लैक वायरस की चपेट में आ गई थी। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। अस्पताल दो नहीं, एक ही है। दोनों तलों पर इलाज होता है। भूतल का हिस्सा किराए पर देने से क्या होता है। न्यू शांति हॉस्पिटल का पंजीकरण मेरे ही नाम से है।
डॉ. अमित सिंह
इलाज करने वाले चिकित्सक
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प्राइवेट अस्पताल में महिला की मौत और एक ही नाम से दो अस्पताल चलने का मामला संज्ञान में नहीं है। जांच कराई जाएगी।
डॉ. संजय कुमार
सीएमओ