लीची के पौधे को देखते किसान बनवारी लाल। संवाद
ऊपर से सख्त और भीतर से नरम दिखने वाली स्वाद से भरपूर लीची अब कौशाम्बी के किसानों की आय का जरिया बनेगी। फिलहाल एक किसान ने इसके उत्पादन की शुरूआत की है। परिणाम बेहतर रहा तो कई और किसान भी लीची की खेती कर सकते है।
सिराथू तहसील के शहजादपुर के किसान बनवारी लाल ने बीएच उद्यान फार्म के तहत वर्ष 2021 में उद्यान विभाग के सहयोग से करीब ढाई बीघा खेत में लीची के पौधे रोपे थे। अब पौधे बड़े हो चुके हैं। मई, जून में लीची तैयार हो जाएगी। इसके बाद बाजार में इसकी बिक्री होगी। उत्पादन को लेकर किसान उत्साहित हैं।
बनवारी लाल कहते हैं, उद्यान विभाग के प्रोत्साहन के बाद करीब तीन बरस पहले लीची की खेती शुरू की थी। बिहार के मुजफ्फरपुर जाकर लीची की फसल देखी। उद्यान विभाग से शतप्रतिशत छूट पर लीची के पौधे लाकर रोप दिया।
कुछ पौधों में बीते वर्ष बौर भी लगा, लेकिन पौधा कमजोर न रहे, इसलिए बौर तोड़ दिया। अबकी पहली बार उत्पादन होगा। आम के साथ ही लीची में भी बौर और फल आते हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर बाजार भी उपलब्ध है।
अन्य किसान हो रहे उत्सुक
मिशन प्रभारी बागवानी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि बनवारीलाल को देख मूरतगंज के किसान राजाराम तथा सेलरहा पश्चिम के कपिल देव मिश्र ने भी लीची को लेकर उत्सुकता दिखाई है। आने वाले दिनों में लीची का उत्पादन करेंगे। बिहार और उत्तर प्रदेश की जलवायु लगभग एक जैसी है। ऐसे में कौशाम्बी में लीची पर मौसम का प्रभाव नहीं पड़ता है, फसल आसानी से हो सकती है।