पटाखों के बारूद में सिर्फ खल्लाबाद स्थित पटाखा फैक्टरी ही नहीं जली, बल्कि कई श्रमिकों के अरमान भी जल गए। घटना में जान गंवाने वाले सगुनीपर के राकेश कुशवाहा का बेटा अभिषेक डीफार्मा का कोर्स करने के बाद भी मजदूरी करने को मजबूर था। क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
राकेश कुशवाहा के परिवार में पत्नी विरोजा देवी और दो बेटे हैं। एक बीघा जमीन के सहारे घर चल नहीं पाता, इसलिए वह पटाखा फैक्टरी में 290 रुपये दिहाड़ी पर मजदूरी करते थे। बेटे अभिषेक ने बताया कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि उनके बेटे भी मजूदरी करें। उनकी इच्छा बेटों को अफसर बनाने की थी।
वह उनका ख्वाब पूरा करना चाहता था। हाईस्कूल तक खूब पढ़ाई की। 64 फीसदी नंबर हासिल किए लेकिन घर की आर्थिक स्थिति देख पढ़ाई से मन उचटता गया।
रिश्तेदारों की मदद से किसी तरह विज्ञान वर्ग से इंटर पास किया, लेकिन नंबर सिर्फ 45 फीसदी ही रहे। रिश्तेदारों की थोड़ी मदद और मिली तो वर्ष 2021-22 में मधुवाचस्पति इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी कॉलेज से डी-फार्मा का कोर्स कर लिया। न चाहते हुए भी पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने लगा।
रह-रहकर पिता का सपना सामने आ जाता था। इसलिए काम के साथ घर पर ही रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। शायद कहीं सरकारी नौकरी में जाने का अवसर मिल जाए। अब पिता का अरमान कैसे पूरा करुंगा। इंटर में पढ़ रहे छोटे भाई की शिक्षा-दीक्षा के साथ परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है। यही कहकर अभिषेक की आंखें भर आईं।