इलाके के एक गांव से 22 मार्च को गायब किशोरी शुक्रवार शाम अचानक अपने घर पहुंची तो परिजनों के आंखों में चमक आई गई। यह खुशी थोड़ी ही देर में गम में बदल गई। किशोरी ने माता-पिता और अन्य परिजनों से दो टूक कहा कि वह यहां रहने नहीं, बल्कि अपना आधार कार्ड लेने आईं हूं। मामला थाने तक पहुंचा, जहां किशोरी घर वालों के साथ जाने को राजी नहीं हुई। शनिवार को पुलिस ने किशोरी से लिखापढ़ी कराई और उसे छोड़ दिया।
22 मार्च को जब किशोरी गायब हुई तो घरवालों ने उसकी संभावित स्थानों पर खोजबीन की, लेकिन वह नहीं मिली। घर वालों ने लोकलाज के भय से मामले की शिकायत पुलिस से नहीं की थी। शुक्रवार को अचानक किशोरी घर पहुंची तो परिवार के लोगों ने उसे अंदर आने के लिए कहा। इस पर उसने कहा कि वह यहां रहने नहीं बल्कि अपना आधार कार्ड लेने आई है। वह बालिग है अपना फैसला खुद कर सकती है।
बेटी की यह बात सुनती ही घरवालों के चेहरे की रंगत उड़ गई। माता-पिता उसे मनाने लगे, लेकिन वह नहीं मानी। सूचना पाकर पुलिस भी आ गई। कोतवाली में किशोरी ने लिखकर दिया कि वह अपने परिवार वालों के साथ नहीं रहना चाहती है। अगर उसके साथ कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदार वह खुद होगी। घर-परिवार से इसका कोई लेना-देना नहीं होगा। प्रभारी कोतवाल जगदीश प्रसाद का कहना है कि घरवालों ने भी ऐतराज नहीं किया। इस वजह से किशोरी से लिखित बयान लेने के बाद जाने दिया गया।