जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अपनों के ही बुने जाल में फंस गई है। भाजपा के सभी पांचों जिला पंचायत सदस्यों का अपने अध्यक्ष के खिलाफ होना, इस चर्चा को बल प्रदान कर रहा है। पर्दे के पीछे भाजपा के ही एक जनप्रतिनिधि का हाथ बताया जा रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर के खिलाफ 26 सदस्यीय सदन के 20 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव दाखिल कर दिया है। डीएम सुजीत कुमार ने फ्लोर टेस्ट के लिए 19 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। अध्यक्ष को कुर्सी बचाने के लिए खुद के अलावा कम से कम आठ सदस्यों की आवश्यकता है। ऐसे में पूरा जोर पार्टी के बागी सदस्यों को पाले में खींचने पर है। लेकिन सदस्य अब पार्टी में किसी की सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने फोन तक बंद कर लिए हैं।
एक सदस्य ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले तो पार्टी के जिम्मेदार ने ही उन्हें ताकत दी और अब कदम आगे बढ़ गए तो अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि फतेहपुर जनपद से आकर जिले की सियासत में डंका बजाने वाले अध्यक्ष के पति जितेंद्र सोनकर की लगातार बढ़ती महत्वाकांक्षा के चलते जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की सहमति के बाद इस तरह की कवायद शुरू हुई है।
भाजपा की गुटबाजी का फायदा उठाने में लगे विपक्षी
सत्ताधरी दल भाजपा जिले में इन दिनों जबर्दस्त गुटबाजी का शिकार है। कार्यकर्ता इसे लेकर बेहद असहज महसूस कर रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ दाखिल अविश्वास प्रस्ताव को भी इसी गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। एक खेमा जिला पंचायत अध्यक्ष के पक्ष में तो दूसरा विरोध में खड़ा है। विपक्षी दल इसका भरपूर फायदा उठाने की तैयारी में हैं।
पांचों सदस्य पार्टी के सच्चे सिपाही
भाजपा जिला अध्यक्ष सुनीता त्रिपाठी का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास जताने वालों में शामिल भाजपा के पांचों सदस्य पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। उनसे बातचीत की जा रही है। पूरी उम्मीद है कि वे ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जो पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला हो।