इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बगैर सहायक अध्यापक को बर्खास्त करने के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कौशाम्बी के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही नियमानुसार नए सिरे से याची को सुनवाई का मौका देते हुए तीन माह में विभागीय जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने प्राइमरी स्कूल मलाक रेजमा, सिराथू के सहायक अध्यापक अतुल कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
बता दें, याची 13 फरवरी 2009 में सहायक अध्यापक नियुक्त हुआ और बीमार पड़ने पर 28 अप्रैल 2012 को मेडिकल छुट्टी लेकर घर गया, जहां विवाद की वजह से विक्षिप्त होकर घर छोड़कर चला गया। पता न चलने पर चित्रकूट के राजापुर थाने में सूचना दी गई। तलाश के बाद भी वह नहीं मिला।
बड़े भाई ने उसकी ओर से छुट्टी मांगी। मिलने पर स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया गया, लेकिन ठीक न होने पर उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। ठीक होने पर उसने 21दिसंबर 2015 को ड्यूटी ज्वाइन कराने की अर्जी दी।
बीएसए ने बताया, उसे 7 अगस्त 2015 को बर्खास्त कर दिया गया है। याची ने उच्चाधिकारियों को भी लिखा। कोई सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कहा गया, उसे कोई चार्जशीट दी गई, न ही विभागीय जांच कार्यवाही की गई।
उसे किसी तरह की सुनवाई का मौका नहीं दिया गया और नैसर्गिक न्याय का उल्लघंन कर बर्खास्तगी कर दी गई, जो अवैध है। कोर्ट ने कहा, याची को अपनी सफाई देने सहित साक्ष्यों, गवाहों के प्रति परीक्षण का अधिकार है।
शिवबाबू त्रिपाठी।
शिवबाबू त्रिपाठी।