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Kaushambi News: राज्य की गोल्ड मेडलिस्ट जागृति तैयार कर रहीं शूटरों की फौज

Thu, 25 Jan 2024 04:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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राइफल से निशाना लगाती जाग़ृति। स्रोत:स्वंय
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धर्मा देवी इंटर कॉलेज को अब शूटरों के स्कूल के नाम से भी जाना जाता है। यहां पढ़ी छात्रा जागृति राइफल शूटिंग में चार बार नेशनल खेल चुकी हैं। अब वह विद्यालय में शूटरों की फौज तैयार कर रही हैं। इनके प्रशिक्षण में दो छोटे भाइयों समेत स्कूल के छह खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चयनित हो चुके हैं।
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सिराथू के धुमाई के शुभनेत्र कुमार किसान हैं। इनकी बेटी जागृति सिंह ने स्कूल स्तर पर होने वाली राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में 2016 से 2019 तक चार बार प्रदेश स्तर पर लगातार गोल्ड जीता है। कोविड के कारण पांचवीं बार प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सकी।
इन दिनों जागृति विश्वविद्यालय स्तर की राइफल शूटिंग प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं। साथ ही धर्मा देवी इंटर कॉलेज में राइफल शूटिंग का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इनसे प्रशिक्षण लेने के बाद छोटे भाई राज्यवर्धन व दिव्यांश ने राज्य स्तर पर हिस्सा लिया।
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साथ ही विद्यालय की छात्रा रेशमा ने गोल्ड, शिखा ने सिल्वर व खुशबू ने कांस्य पदक जीता है। सभी राष्ट्रीय स्तर पर भी शामिल हुए। खुशबू बताती हैं कि जागृति उन्हें शिक्षक नहीं बड़ी बहन की तरह खेल की बारीकियां सिखाती हैं। हर सवाल पर उसका समाधान देती हैं।
वहीं शिखा ने बताया कि उनकी इस सफलता में जागृति का पूरा योगदान है। शायद जागृति जैसी कोच की बदौलत ही उन्हें यह सफलता मिली है।

अचानक मिल गया खेलने का मौका
जागृति महज 19 साल की हैं। इतनी कम उम्र में इन्होंने अपने जैसे दर्जनों खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं। इन दिनों धर्मा देवी में 50 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। जागृति ने बताया, कक्षा एक से नौवीं तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने के बाद 2016 में हिंदी मीडियम में पढ़ाई के लिए धर्मा देवी इंटर कॉलेज में नामांकन कराया था।
इसी बीच स्कूल में राइफल शूटिंग के लिए खिलाड़ियों का नाम मांगा जा रहा था। जागृति ने रुचि दिखाई और अपना नाम प्रतियोगिता के लिए दे दिया। घर पर अभ्यास किया और सफलता की कहनी लिख डाली।

रात में करती थी अभ्यास
जागृति के पास संसाधन की कमी थी। ऐसे में रात के समय वह छिपकर अभ्यास करती थीं। शूटिंग वाली गन से कभी टार्च जलाकर तो कभी बल्ब की रोशनी में अभ्यास किया। हंसते हुए पिता शुभनेत्र बोले, एक बार भाई ने राइफल देकर निशाना लगाने को कहा तो जागृति ने एक फायर से घर से कुछ दूरी पर लगे सागौन के पेड़ की डाल तोड़ दी थी।
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