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Kaushambi News: रामज्योति निकालने पर लगा दिया था सरकार ने प्रतिबंध

Tue, 16 Jan 2024 04:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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शिवदानी
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रामज्योति से चायल में राम मंदिर आंदोलन की अलख जगाने वाले पूर्व विधायक शिवदानी ने कारसेवकों के संघर्ष की कहानी साझा की। कहा, वर्ष 1990 में विश्व हिंदू परिषद की ओर से रामज्योति निकालकर हिंदुओं को आंदोलन से जोड़ने की पहल की गई थी। तत्कालीन सरकार को जब इसकी भनक लगी तो रामज्योति निकालने पर रोक लगाते हुए उसने पुलिस प्रशासन को अलर्ट कर दिया।
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पूर्व विधायक ने बताया, विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री देवी प्रसाद मिश्र ने सरायअकिल क्षेत्र में रामज्योति की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी। चार अक्तूबर 1990 को कारसेवक रामज्योति लेकर कस्बे में निकले ही थे कि पुलिस ने घेर लिया।
कृष्ण नारायण रस्तोगी, ज्ञानचंद केसरवानी, महेशचंद्र, विजय कुमार, त्रिलोकीनाथ, पीयूष रस्तोगी, राकेश कुमार, प्रदीप हलवाई, भैयालाल रस्तोगी, नवनीत, पप्पू, विनय कृष्ण सोनी, विनोद कुमार, विनय कुमार समेत 43 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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रामज्योति आंदोलन की प्रदेश में हुई यह पहली गिरफ्तारी थी। सभी करीब 23 दिन नैनी जेल में रहे, फिर रिहाई हुई। इसी दौरान 13 अक्तूबर 1990 को बाबू कल्याण सिंह को चित्रकूट से गिरफ्तार कर नैनी जेल लाया गया, जहां उनके साथ रहने का अवसर मिला।
वर्ष 1992 में जब अयोध्या में कारसेवक जुटे थे तो उनके लिए यहां से पूड़ी सब्जी बनवाकर ट्रैक्टर ट्रॉली में भिजवाया जाता था। ग्रामीण गेहूं देते थे तो व्यापारी घी। राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार हो रहा है, यह सोचकर बड़ी खुशी है।

बाबरी मस्जिद गिरने के बाद तिरपाल ओढ़कर भागना पड़ा था

कस्बे के कृष्ण नारायण रस्तोगी ने बताया कि पांच दिसंबर1992 को रामभजन त्रिपाठी, पीयूष रस्तोगी, सूरजपाल, सुभाष ताम्रकार के साथ कारसेवा के लिए अयोध्या गया था। छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों की ओर से बाबरी मस्जिद गिराने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया।
फिर वहां मौजूद कारसेवकों के लिए अयोध्या छोड़ने की घोषणा कर दी गई। तब तिरवाल ओढ़कर ट्रक के पीछे छिपकर वहां से भागा था। पहले लखनऊ गया, फिर वहां से प्रयागराज पहुंचा था। साथ गए चार लोगों का साथ छूट गया था। राम मंदिर में रामलला को विराजते हुए देखना सौभाग्य की बात है।
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