21 वीं सदी में दोआबा के लोग अंधविश्वास के भंवरजाल में जकड़े हैं। खासकर सर्पदंश जैसी घटनाओं में लोग घटना के पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़फूंक कराते हैं। नतीजतन अस्पताल ले जाने तक काफी देर हो जाती है। ऐसी ही एक घटना में सर्पदंश के शिकार व्यक्ति की झाड़फूंक में समय गंवाने से मौत हो गई।
सरायअकिल कोतवाली के तरना गांव निवासी हरिश्चंद्र सिंह (50) किसानी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। सोमवार सुबह वह खेत में काम कर रहे थे। इस दौरान उन्हें सर्प ने डस लिया। हरिश्चंद्र के शोर मचाने पर दूसरे खेतों में काम कर रहे लोग मौके पर पहुंचे और परिजनों को खबर दी।
ग्राम प्रधान हर्षराज सिंह का कहना है परिवार के लोग हरिश्चंद्र को इलाज के लिए ले जाने के बजाय झाड़फूंक वालों के पास ले गए। झाड़फूंक से हरिश्चंद्र को राहत नहीं मिलने पर परिवार के लोग प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने हरिश्चंद्र को मृत घोषित कर दिया। घटना से पीड़ित परिवार में कोहराम है। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में स्नैक बाइक के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। जिले में खासकर खासकर तीन तरह के सांप पाए जाते हैं। हर सांप जहरीला नहीं होता। इसलिए लोगों को चाहिए की झाड़फूंक व तंत्रमंत्र के बजाय चिकित्सक के पास मरीज को ले जाएं। वहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर इलाज किया जाएगा। अक्सर अस्पताल लाने में सर्पदंश के शिकार लोगों को परिवार के सदस्य देर कर देते हैं। इसकी वजह से मौत हो रही है।
डॉ. एचपी मणि, डिप्टी सीएमओ