बच गई थी बड़े बेटे की जान
अजुहा। सपा नेता की हत्या में शामिल लोगों को यकीन नहीं था कि उनका बेटा व पूर्व सहकारी बैंक अध्यक्ष सुघर सिंह दूसरी गाड़ी में हैं। अगर पिता की गाड़ी में सुघर सिंह होते तो उनके साथ भी अनहोनी हो जाती। हमलावरों ने शिवसागर सिंह को सटाकर कई गोलियां मारी थीं। मौत की पुष्टि के लिए दिवंगत नेता को हिलाकर भी चेक किया गया था।
गिरीश के पिता की हत्या में सजा काट रहे सुघर सिंह
मंझनपुर। सपा नेता हत्याकांड के मुख्य आरोपी गिरीश मिश्रा के पिता सियालाल मिश्रा उर्फ वैद्यजी की चार जुलाई 1994 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का गिरीश चश्मदीद गवाह था। मामले में दिवंगत सपा नेता के बेटे सुघर सिंह, भाई रामसागर सिंह, गनर रामलोचन व कालू राम के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया गया। इस हत्याकांड में सुघर सिंह को आजीवन कारावास की सजा मिली है।
लापरवाही पर सीओ सिराथू हुए थे सस्पेंड
सिराथू। जिस स्थान पर सपा नेता शिवसागर सिंह की गोली व बम मारकर हत्या की गई वहां से सिराथू पुलिस चौकी व सीओ ऑफिस सात मीटर की दूरी है। इसके अलावा एक किलोमीटर पर सैनी कोतवाली थी। हमलावर वारदात को अंजाम देकर भाग निकले थे। इसे लेकर तत्कालीन सपा सरकार ने सिराथू सीओ रहे लक्ष्मी निवास मिश्रा को सस्पेंड कर दिया था।
सिराथू और कड़ा ब्लॉक में सपा नेता की बोलती थी तूती
दिवंगत सपा नेता शिवसागर सिंह की इलाके में काफी धाक थी। खासकर सिराथू व कड़ा विकास खंड में उनका सिक्का चलता था। जिस पर हाथ रखा वह ब्लॉक प्रमुख या गांव का प्रधान बन जाता था। सपा के वरिष्ठ नेताओं से भी करीबी रिश्ता था। शिवसागर सिंह की हत्या की खबर सुन खुद तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री रहे शिवपाल यादव शोक संवेदना जताने उनके घर आए थे।
सैनी कोतवाली के शाखा गांव निवासी शिवसागर सिंह ने इलाहाबाद विश्व विद्यालय से परास्तानक तक की पढ़ाई की थी। वह वालीबॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे। वर्ष 1980 में उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1982 से लेकर 1994 तक वह सिराथू ब्लॉक के प्रमुख रहे। इसके बाद वह सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। शिवसागर सिंह काफी मिलनसार स्वाभाव के थे। क्षेत्र के प्रधान, बीडीसी से वह हमेशा संपर्क बनाए रखते थे और दुख सुख में शामिल होते थे। क्षेत्रीय लोग उन्हें बाबूजी कहकर सम्मान देते थे।