खेत की मिट्टी में कैल्शियम और सल्फर की कमी है तो किसान परेशान न हों। जिले को 200 एमटी जिप्सम मिल गया है। राजकीय बीज भंडारों में इसकी आपूर्ति भी हो चुकी है। इसका उपयोग करके खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है।
राजस्थान से आने वाली इस मिट्टी में कैल्शियम और सल्फर पाया जाता है। इसका ज्यादातर प्रयोग ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता है। खेतों की उर्वरा शक्ति कम होने पर भी इसका सहारा लिया जा सकता है। हाल ही में कृषि विभाग को 4009 बैग जिप्सम उपलब्ध कराया गया है। एक बैग में 50 किग्रा जिप्सम होता है।
जिला मुख्यालय से यह जिप्सम सभी ब्लॉकों के राजकीय बीज भंडारों में भेजा चुका है। बीज भंडार प्रभारियों ने इसका वितरण भी शुरू कर दिया है। पहले एक बैग का 253 रुपये शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब इसे घटाकर 210 रुपये कर दिया गया है। जिप्सम खरीदने के बाद किसानों को शुल्क की 75 फीसदी धनराशि सब्सिडी के तौर पर वापस भी मिल जाएगी।
लगातार तीन साल प्रयोग पर सोना उगलती मिट्टी
कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ.मनोज सिंह का कहना है कि एक बीघे बंजर भूमि में ऊसर सुधार के लिए सात से आठ बोरी जिप्सम लगता है। पहले मेड़बंदी और जोताई के बाद खेत में इसे मिलाते हैं। फिर लगातार 10 दिन तक उसमें पानी भरकर रखते हैं। इसके बाद पानी को निकाल कर धान की रोपाई कर देते हैं। यही प्रक्रिया हर फसल के सीजन में लगातार तीन साल तक करने से बंजर भूमि भी सोना उगलने लगती है। वहीं, सामान्य खेत में प्रति बीघे तीन से चार बोरी जिप्सम का प्रयोग होता है।
ब्लॉकवार जिप्सम का आवंटन
ब्लॉक - बैग - वजन (एमटी में)
सिराथू - 700 - 35
कड़ा - 350 - 17.50
मूरतगंज - 480 - 24
चायल - 400 - 20
नेवादा - 469 - 23.45
कौशाम्बी - 530 - 26.50
सरसवां - 760 - 38
मंझनपुर - 320 - 16
कुल - 4009 - 200.45
जिले के सभी राजकीय बीज भंडारों में जिप्सम भेज दिया गया है। किसान जब चाहें प्राप्त कर सकते हैं। इसमें 75 फीसदी सब्सिडी भी मिलेगी।
मनोज कुमार गौतम, जिला कृषि अधिकारी