बच्चों के जांच की फर्जी रिपोर्टिंग के मामले में सीएमओ सिराथू में तैनात राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की दो टीमों के सभी सदस्यों का सितंबर का मानदेय रोक दिया है। साथ ही दो दिन के अंदर जवाब देने को कहा है।
आरबीएसके के तहत स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके लिए हर सीएचसी में दो-दो टीमें तैनात की गई हैं। हर टीम में दो-दो चिकित्सकों के साथ अन्य कर्मचारी लगाए गए हैं। इन्हें वाहन भी दिया गया है। बावजूद, इसके कई टीमें स्कूलों में नहीं जाती थी। बल्कि, फर्जी रिपोर्ट लगा देती थीं।
अमर उजाला ने 31 अगस्त को प्रकाशित हुई खबर में इसका खुलासा किया था। सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच कराई। इसमें तथ्य सही मिले। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीएमओ ने सिराथू सीएचसी में तैनात आरबीएसके की दोनों टीमों के सभी सदस्यों का सितंबर महीने का मानदेय रोक दिया है। जिन पर कार्रवाई हुई है उनमें एक टीम के डॉ. रोहित केसरवानी, डॉ. पूजा ठाकुर, ऑप्टोमेट्रिस्ट सुमेंद्र मणि त्रिपाठी और दूसरी टीम की डॉ. निकहत असगर, फीजियोथिरेपिस्ट बिलाल अहमद व स्टाफ नर्स ऊषा देवी शामिल हैं। सीएमओ ने इन सभी से दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण तलब किया है। स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिलने पर संविदा समाप्ति की चेतावनी दी है।
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तीन बीपीएम समेत पांच अन्य कर्मचारियों का रोका मानदेय
बीते दिनों हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम मधुसूदन हुल्गी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रमों की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसी के तहत सीएमओ ने विभागीय कार्यों में लापरवाही पर सरसवां के बीपीएम मनोज यादव, मूरतगंज के बीपीएम चंद्रकांत पांडेय और सरसवां के बृजलाल यादव का मानदेय रोक दिया है। इसके अलावा सीएचसी कड़ा में तैनात आरबीएसके के डॉ. वीरेंद्र कुमार और डॉ. वंदना सिंह का भी मानदेय रोका गया है। चार सितंबर को निरीक्षण के दौरान यह अनुपस्थित मिले थे। इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन चिकित्सकों ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर कार्रवाई की गई।
विभागीय कार्यों में लापरवाही पर सीएचसी में तैनात आरबीएसके की दोनों टीमों, कड़ा के दो चिकित्सकों और तीन ब्लॉकों के बीपीएम का वेतन रोका गया है। इनसे जवाब मांगा गया है।
डॉ. संजय कुमार
सीएमओ