शाहपुर उपरहार गांव में आयोजित ग्राम चौपाल में मौजूद फरियादी। स्रोत: प्रशासन
गैरजनपद स्थानांतरित हो चुके चकबंदी अधिकारी व न्यायालय लिपिक को निलंबित करने की संस्तुति डीएम ने की है। चकबंदी के वादों के निस्तारण में नियमों की अनदेखी पर यह कार्रवाई की गई है।
चायल तहसील क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी निवासी आनंद कुमार ने डीएम मधुसूदन हुल्गी से शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने चकबंदी के वादों के निस्तारण में अनियमितता के साथ ही तत्कालीन चकबंदी अधिकारी मिथिलेश कुमार पर रुपये मांगने समेत अन्य आरोप लगाए थे।
डीएम ने इसकी जांच एडीएम (न्यायिक) प्रबुद्ध सिंह को सौंपी थी। जांच पूरी करके चार दिन पहले ही एडीएम ने अपनी रिपोर्ट डीएम को दी। एडीएम के मुताबिक जांच के दौरान तत्कालीन चकबंदी अधिकारी के द्वारा रुपये मांगने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन, चकबंदी के वादों के निस्तारण में तमाम कमियां पाईं हैं।
करीब 40 से 45 पत्रावलियां ऐसी थीं, जिनके निस्तारण में नियमों का पालन नहीं किया गया था। चकबंदी अधिकारी के साथ ही तत्कालीन चकबंदी न्यायालय के लिपिक धर्मेंद्र सिंह भी इसके दोषी पाए गए। इस वक्त चकबंदी अधिकारी मिर्जापुर और न्यायालय लिपिक प्रयागराज में तैनात हैं।
एडीएम की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने चकबंदी अधिकारी व न्यायालय लिपिक को निलंबित किए जाने की संस्तुति उच्चाधिकारियों से की है।
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चौपाल लगाकर सुनीं चकबंदी से जुड़ीं समस्याएं
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मंझनपुर। सदर तहसील के शाहपुर उपरहार गांव में मंगलवार को उप संचालक चकबंदी प्रबुद्ध सिंह ने चौपाल लगाई। गांव में चकबंदी से जुड़ी लोगों की शिकायतें सुनीं। संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को इनके निस्तारण निर्देश दिए। साथ ही कहा कि शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापरक किया जाए। किसी तरह की मनमानी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। संवाद