किशोरी के पिता ने गर्भपात की मांगी थी अनुमति
किशोरी के पिता का कहना है वह मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाता है। अगस्त में जब उसे बेटी के गर्भवती होने की जानकारी मिली तो उसने पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि चचेरे भाई ने दुष्कर्म किया था। इसके बाद उसने अदालत में अर्जी देकर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से गर्भ समापन की रिपोर्ट तलब की। इसके बाद बोर्ड ने रिपोर्ट दिया कि गर्भपात नहीं कराया जा सकता है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त गुजर गया और बेटी के पेट में पल रहा बच्चा छह माह का हो गया। मजबूरी में उसे बेटी का प्रसव कराना पड़ा।
दुष्कर्म पीड़िता का बच्चा प्री-मेच्योर हुआ है। प्रसव होने में करीब एक महीने का वक्त बाकी था। इस वजह से बच्चे को मेच्योर होने तक एक महीने तक जिला अस्पताल में रखा जा सकता है। मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति को भी दे दी गई थी। आगे जैसा भी समिति फैसला लेगी, उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस