अयोध्या में राम लला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जहां शहर काजी ने चुप्पी साधे रखी, वहीं अन्य धर्माचार्यों और धर्मानुरागी उत्सव के इस पल को लेकर अभिभूत रहे। सभी ने कहा, भगवान राम हम सभी के आदर्श हैं। सदियों के इंतजार के बाद उनका टाट से निकलकर ठाट में पहुंचना हम सभी के लिए गौरवशाली पल हैं।
साढ़े पांच सौ वर्षों बाद भगवान टाट से निकलकर ठाट में पहुंचे हैं। आज भगवान की प्राण प्रतिष्ठा से जो ख़ुशी मिली है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।
पं.ज्ञानेंद्र शास्त्री, पूर्व प्राचार्य, हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय
भगवान श्री राम की प्रतिष्ठा के मौके पर भारत ही नहीं, बल्कि अखिल ब्रह्मांड राममय हो गया। अदालत के साथ इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। आज आनंद नहीं, परमानंद की अनुभूति हो रही है।
रामानंद वर्मा-अध्यक्ष,करारी इंटर कॉलेज
अयोध्या में पांच सौ वर्षों के बाद भगवान श्रीराम का मंदिर बनने से जैन समाज में हर्ष का माहौल है। सौभाग्य है कि अपनी आंखों से रामलला का मंदिर बनने का साक्षी हूं।
विजय कुमार जैन (कल्लू),सराय अकिल
जैन धर्म के पांच तीर्थंकरों का जन्म अयोध्या में हुआ है। भगवान श्रीराम का जन्म भी अयोध्या में हुआ है। इसलिए अयोध्या भूमि हमारे लिए पवित्र रही है। प्रभु श्रीराम का मंदिर बनने से जैन समाज में अत्यंत खुशी है।
संतोष कुमार जैन,सराय अकिल
विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद समुदाय को कष्ट हुआ था। अब अदालत के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण और विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हुई है।
अहमद हबीब, शहर काजी
भगवान श्रीराम हम सभी के आदर्श हैं। अयोध्या में उनकी प्राण-प्रतिष्ठा का उत्सव मनाया जाना अच्छी बात है, लेकिन असल में रामराज्य की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब शेर और बकरी एक घाट पर पानी पीएंगे।
हाजी अयाज अहमद-सामाजिक कार्यकर्ता
तथागत बुद्ध स्वयं भगवान विष्णु के अंश थे। इसलिए राम हम सभी के आदर्श हैं। प्रभु की जन्मस्थली में भव्य मंदिर का निर्माण और उनकी प्राण-प्रतिष्ठा सरीखा उत्सव सभी के लिए गौरवशाली है।
-टी विशुद्ध थेरो-प्रबंधक श्रीलंका बुद्ध बिहार
भगवान राम हम सभी के ऑराध्य हैं। इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है कि हम लोग प्रभु श्रीराम के प्राण-प्रतिष्ठा सरीखे अभूतपूर्व पल को देख व सुन रहे हैं।
सुरेश कुमार-बौद्ध धर्मानुयायी
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।
रामानंद वर्मा।