चरक ऋषि की तपोस्थली और भगवान राम के वनगमन से जुड़े धर्मस्थल चरवा में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेला शुरू हुआ। मेले का श्रीगणेश करते हुए पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार ने कहाकि इस धर्मस्थल की बदहाली दूर करके इसे राष्ट्रीय धार्मिक मानचित्र में लाया जाएगा। वहीं मेले का पहला दिन अव्यवस्था का शिकार रहा। पर, रात में उत्तर-मध्य सांस्कृतिक केंद्र के कलाकारों ने भजन समेत अपनी अन्य प्रस्तुतियों से रंग जमाकर लोगों का मन मोह लिया।
कौशाम्बी का चरवा गांव भगवान श्रीराम के वन गमन से जुड़ा है। मान्यता है कि श्रृंगवेरघाट से गंगा पार उतरने के बाद उन्होंने वन में अपनी पहली रात यहीं गुजारी थी। चरवा मंदिर के समीप बड़ा सा ताल है। इसे आज भी लोग रामजूठा तालाब के नाम से जानते हैं। इसका नामकरण भी सुबह उठकर भगवान के स्नान के कारण पड़ा हुआ बताया जाता है। वहीं यह स्थान चरक ऋषि की तपोस्थली भी माना जाता है। हालांकि यह पौराणिक स्थल स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी से उपेक्षित पड़ा है। इधर, कुछ सालों से स्थानीय लोगों ने समिति का गठन करके इसके विकास की कवायद शुरू की है। इसीक्रम में यहां राष्ट्रीय रामायण मेले की शुरूआत की गई है। इस साल तीन दिवसीय रामायण मेले का शुभारंभ शुक्रवार को सपा नेता और पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहाकि राम विश्रामस्थल के इस पौराणिक धाम को सजाने-संवारने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। सौंदर्यीकरण कराकर इस देश के धार्मिक मानचित्र में शामिल कराने का प्रयास होगा। हालांकि रामायण मेले में यहां प्रशासन की ओर से जागरूकता संबंधी स्टाल लगाने की भी घोषणा हुई थी। पर, पहले दिन एक भी स्टाल नहीं लगे। इसके कारण प्रथम दिन का आयोजन फीका रहा। अलबत्ता रात में उत्तर मध्य सांस्कृतिक कें द्र के कलाकारों ने आकर भजन, गीत आदि के माध्यम से लोगों का मन मोह लिया।