जिले में हर तरफ झोलाछाप व अवैध निजी अस्पतालों की भरमार है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। इनके खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जरूरत है। महकमा दावे तो कर रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डिप्टी सीएम तक से अवैध वसूली व अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। अब लोग दबी जुबान से कहने लगे हैं कि आरोपों में कहीं न कहीं सच्चाई तो जरूर है।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचल तक झोलाछाप हैं और नियमों के विपरीत निजी अस्पताल चल रहे हैं। इस वक्त विभाग में सिर्फ 106 अस्पताल व क्लीनिक ही पंजीकृत हैं। जबकि, पूरे जिले में करीब 300 से अधिक ऐसे प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। बड़े पैमाने पर नियमों के विपरीत क्लीनिक व अस्पताल अकेले मंझनपुर में ही चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग पर इन्हें संरक्षण देने के आरोप जब-तब लगते रहते हैं।
इसी वर्ष 13 मार्च को नगर के एक निजी अस्पताल की महिला संचालक ने डीएम को शिकायती पत्र दिया था। इसमें नियमों के विपरीत अस्पतालों के लाइसेंस देने व अवैध वसूली करने के आरोप लगाए थे। जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर ने भी विभाग के एक अफसर पर नर्सिंग होम संचालकों से अवैध वसूली करने के आरोप जड़े थे। यही नहीं, नियमों के विपरीत अस्पतालों व क्लीनिकों के लाइसेंस जारी करने समेत अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। जनवरी में उन्होंने इसका पत्र डिप्टी सीएम को भेजा था। लेकिन, नतीजा सिफर रहा।
इधर, पिछले कई दिनों से अवैध क्लीनिक व अस्पतालों का मुद्दा एक बार फिर गरमाया है। महकमे के अधिकारी इन पर कार्रवाई की बात तो कह रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में झोलाछाप को विभागीय संरक्षण के आरोपों में सच्चाई झलकने लगी है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारियों को लिखित आदेश का इंतजार
झोलाछाप पर कार्रवाई के लिए जिला मुख्यालय में एक डिप्टी सीएमओ को नोडल बनाया जाता है। अभी तक यही टीम पूरे जिले में कार्रवाई करती आ रही थी लेकिन, हाल ही में सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने ब्लॉकों में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारियों को भी जांच का अधिकार दे दिया है। फिर भी चिकित्साधिकारी जांच नहीं कर रहे हैं। कुछ चिकित्साधिकारियों का कहना है कि सिर्फ मौखिक आदेश हुआ है। लिखित आदेश मिले तो कार्रवाई कर पाएंगे।
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जिले में झोलाछाप की सकि्रयता व अवैध अस्पतालों की शिकायतें मिल रहीं हैं। इसे देखते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारियों को भी जांच का अधिकार दिया गया है। जल्द ही प्रशासन की मदद से बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. संजय कुमार
सीएमओ