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सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष की कथा का प्रसंग सुन भक्तिरस में डूबे श्रोता

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सरायअकिल। कस्बा स्थित फकीराबाद शिव मंदिर परिसर में संगीतमय श्रीमद्भावगत कथा का रविवार को अंतिम दिन था। इसमें सुदामा चरित्र व राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनकर श्रोता भक्ति भाव में डूब गए। वृंदावनधाम से आए कथावाचक आचार्य मधुरम महाराज ने कहा कि द्वारपाल ने द्वारिकाधीश से जाकर कहा, प्रभु द्वार पर एक ब्राह्मण आया है और आपसे मिलना चाहता है। वह अपना नाम सुदामा बता रहा है। यह सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंच गए। यह सब देख वहां लोग यह समझ ही नहीं पाए कि आखिर सुदामा में ऐसा क्या है जो भगवान दौड़े-दौड़े चले आए।
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बचपन के मित्र को गले लगाकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें राजमहल के अंदर ले गए। अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके पांव पखारे। सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया। दुनिया के सामने यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान है। इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। कथावाचक ने सुदामा चरित्र के अलावा राजा परीक्षित के मोक्ष व कई अन्य भावपूर्ण कथाओं का भी वर्णन किया। इस अवसर पर विजय केशरवानी, अनिल केशरवानी, सुनील केशरवानी, प्रदीप केशरवानी, दिलीप केशरवानी, रामू अग्रहरि, कल्लू अग्रहरि, होरीलाल केशरवानी आदि मौजूद रहे।
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