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Kaushambi News: पंजीकरण न डॉक्टर का पता, चमक रहा जांच का धंधा

Sun, 23 Jun 2024 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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स्वास्थ्य विभाग में मात्र दो पैथोलॉजी सेंटर पंजीकृत हैं। जबकि जिले में करीब दो दर्जन सेंटर संचालित हैं, जिन्हें कोई देखने वाला नहीं है। जिला मुख्यालय में ही छह सेंटर हैं। कई मेडिकल कॉलेज के आसपास ही संचालित हो रहे हैं।
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नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की तरह प्राइवेट पैथोलॉजी का भी स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण होता है। इस समय मंझनपुर, सरायअकिल, भरवारी, सिराथू, कड़ा, पश्चिमशरीरा, महेवाघाट समेत अन्य कस्बों में करीब दो दर्जन से अधिक प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं। पंजीकृत दो पैथोलॉजी सेंटर सिराथू में हैं।
इनके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी सेंटर संचालित हैं, जिनका कोई लेखा-जोखा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की मौन स्वीकृति पर ही अवैध सेंटर संचालित हो रहे हैं। अफसरों के अधिक दबाव में कभी टीमें निकलीं भी तो ग्रामीण अंचल में छापेमारी और इक्का-दुक्का सेंटर सील कर लौट आईं। बाद में वे सेंटर संचालित होने लगते हैं।
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इनसेट

पैथोलॉजिस्ट तो दूर एमबीबीएस तक नहीं



बिना चिकित्सक और लैब टेक्नीशियन के प्राइवेट पैथालॉजी भी नहीं चल सकती। कम से कम एमबीबीएस चिकित्सक होना जरूरी है। इसमें भी सिर्फ हिमोग्लोबिन, एलएफटी-केएफटी, सीबीसी आदि खून की सामान्य जांचें ही हो सकती हैं। थायराइड प्रोफाइल व विटामिन प्रोफाइल जैसी हार्मोनल जांचों के लिए एमडी पैथोलॉजी होना चाहिए। पंजीकरण के दौरान इन चिकित्सकों की डिग्री लगानी पड़ती है। इसके अलावा बॉयो वेस्ट और प्रदूषण नियंत्रण से अनापत्ति प्रमाण पत्र होना चाहिए। जिले में संचालित ज्यादातर पैथोलॉजी में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं।



इनसेट

काम कलेक्शन का, नाम पैथालॉजी



जिले में संचालित ज्यादातर प्राइवेट पैथोलॉजी में टेक्निकल स्टॉफ नहीं है। डॉक्टर और लैब टेक्नीशियन तक नहीं रखे गए हैं। दूसरी पैथालॉजी में कुछ दिन काम करके आए युवाओं के अनुभव के सहारे संचालक अपनी दुकान चला रहे हैं। कई केंद्रों में सिर्फ मरीजों के सैंपल एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद दूसरी पैथोलॉजी में जांच कराकर अगले दिन उन्हें रिपोर्ट दे दी जाती है।

वर्जन



हर साल अप्रैल में प्राइवेट अस्पतालों और पैथोलॉजी के पंजीकरण का नवीनीकरण होता है। इसलिए अब तक कार्रवाई का कोई अभियान नहीं चलाया गया। सिर्फ दो पैथोलॉजी संचालकों ने पंजीकरण कराए हैं। जल्द ही अन्य के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अवैध सेंटरों पर कार्रवाई होगी।
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डॉ. सुष्पेंद्र कुमार, सीएमओ
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