जिले में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सजग हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। नसबंदी की पिछले तीन साल की रिपोर्ट पर नजर डालें तो पुरुष महिलाओं से काफी पीछे दिखाई देंगे।
आज विश्व जनसंख्या दिवस है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग भी लगातार प्रयास कर रहा है। हम दो हमारे दो का नारा दिया जा रहा है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी महिलाएं ही दिखा रहीं हैं। चालू वित्तीय वर्ष को छोड़ दें तो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा 133 पुरुष नसबंदी वर्ष 2020-21 में हुई। इसके बाद के दो वर्षों में पुरुषों की नसंबदी का आंकड़ा 100 के पार तो दूर उसके करीब भी नहीं पहुंच सका, जबकि हर साल ढाई से तीन हजार महिलाओं ने नसबंदी कराई है।
12 साल में बढ़ गई 3.18 लाख आबादी
2011 में जनगणना के बाद से अब तक जिले की आबादी 3,18,401 बढ़ गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के समय जनपद की आबादी 15 लाख 99 हजार 596 थी। अब अनुमानित आबादी करीब 19 लाख 17 हजार 997 बताई जा रही है। पिछले साल यहां की जनसंख्या 18 लाख 78 हजार 825 थी। इस हिसाब से एक साल में जनसंख्या 39 हजार 172 बढ़ गई है। संवाद
वर्ष - पुरुष नसबंदी - महिला नसबंदी
2020-21 133 3439
2021-22 77 4065
2022-23 61 2845
2023-24 17 176