बारा। कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए मॉडल तालाब देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार हो गए हैं। कहीं धूल उड़ रही है तो कहीं यह तालाब झाड़ियों और जलकुंभी से पटे है। कई तालाबों का तो अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर है। इससे जल संरक्षण की मुहिम की पोल खुल रही है।
ब्लॉक क्षेत्र के बैगवां फतेहपुर, रसूलपुर बड़गांव, म्योहर, दिया उपरहार बेरौंचा, कोसम खिराज, बारा, कनैली, मुस्तफाबाद, बिदांव, अवाना आलमपुर, हकीमपुर, गौहानी, अर्का फतेहपुर, मोहद्दीनपुर कोरांव समेत दो दर्जन गांव में मॉडल व आदर्श तालाब बनाए गए हैं। बेहनपुरवा के धर्मनारायण, बारा के रामचन्द्र, मुस्तफाबाद के मिश्री लाल आदि का कहना है कि जल संरक्षण और पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए गांव के वर्षों पुराने तालाबों पर लाखों रुपये खर्च कर इन्हें मॉडल और आदर्श तालाब का नाम दिया था, लेकिन उपेक्षा के चलते अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
अब अमृत सरोवर योजना के तहत सरकार करोड़ों का बजट तालाबों के सौंदर्यीकरण पर खपाया जा रहा है, लेकिन आदर्श और मॉडल तालाबों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। कहीं पर यह तालाब सूखे हैं तो कहीं जलकुंभी व झाड़ियों से पटे हुए हैं।
आकर्षक थी तालाबों की व्यवस्थाएं
बारा। मॉडल व आदर्श तालाबों के चारों ओर छायादार वृक्ष थे। सीमेंटेड कुर्सियां लगाई गईं थीं, ताकि लोग यहां पर आकर कुछ वक्त बिता सकें। उन्हें बैठने में दिक्कत न हो। गर्मी के दिनों में पशु पक्षी यहां आकर पानी पी सकें और छाया मिल सके। यह सब इंतजाम कराए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में व्यवस्थाएं बदहाल हो गईं। संवाद
तालाबों की साफ-सफाई व पानी भरने के लिए ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए थे। कहीं कोई कमी रह गई है तो उसे दूर कराया जाएगा।
-प्रवीण कुमार, बीडीओ कौशाम्बी