फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेंथा: मवेशियों का डर न बिक्री चिंता, खेती के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान

Thu, 21 Mar 2024 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
विज्ञापन
मेंथा फसल की फाइल फोटो।
विज्ञापन
आमतौर पर गर्मी में जहां खेत खाली रहते हैं, वहां अब मेंथा की फसल किसानों को राहत दे रही है। इस फसल के लिए न मवेशियों का डर रहता है और न ही बिक्री की चिंता रहती है। ऐसे में इस खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है।
विज्ञापन

आठ से 10 हजार प्रति बीघा की लागत वाली इस फसल से अच्छा मुनाफा होता है। बीते तीन वर्ष में फसल का रकबा दोगुना हो गया है।
आलू, गेहूं, चना व सरसों की फसल कटाई के बाद गर्मी में खेत खाली रहते हैं। इस मौसम में किसान मेंथा की फसल तैयार करते हैं। जिले में सरसवां, सिराथू व नेवादा ब्लॉक क्षेत्र में मेंथा की खेती अधिक होती है।
गर्मी में इस फसल को पानी की जरूरत होती है। ऐसे में फसल नलकूप के आसपास तैयार की जाती है। फसल तैयार करने में लगने वाली लागत से मुनाफा पांच से छह गुना तक होता है।
विज्ञापन

मेंथा के खेत हरे- भरे होते हैं, लेकिन इसे मवेशी नष्ट नहीं करते। गंध के कारण फसल से मवेशी दूर रहते हैं। इससे सुरक्षा की के लिए किसान को परेशान नहीं होना पड़ता।
फसल का उत्पादन भी आसान होता है। बेहन तैयार कर पौधे की रोपाई धान की तरह की जाती है। 60- 90 दिन में फसल तैयार हो जाती है। फसल को प्लांट के माध्यम से उबाल कर तेल निकाला जाता है।
इसके बार बाहरी व्यापारी घर से ही तेल खरीद ले जाते हैं। जिले में सब से अधिक बाराबंकी के कारोबारी आते हैं।

उद्यान निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया जिले में मेंथा की खेती का ग्राफ बढ़ा है। जिले में सरसवां के हिनौता, पश्चिमशरीरा, अढौली, पुरवार, बरौला। सिराथू ब्लॉक के उदहिन खुर्द, मलकिया, बेलाफतेहपुर, तुलसीपुर, कलुआपुर, कैंमा, अनेठा आदि गांव में किसान मेंथा की फसल तैयार करते हैं।
तीन वर्षों में मेंथा खेती का क्षेत्रफल दोगुना हो गया है। कोविड में करीब दो हजार बीघे में फसल तैयार की गई थी। इसके बाद लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा और चार से पांच हजार बीघे में उत्पादन किया जा रहा है।


मेंथा की फसल गर्मी के दिनों में होती है। ऐसे में खेत खाली होने के कारण जो भी लाभ हो बेहतर है। किसान मेंथा की फसल तैयार कर लाभ ले रहे हैं। पहले कम ही किसान इस फसल को तैयार करते थे। अब हर गांव में इसकी खेती होती है। - धीरज कुमार, किसान


फसल तैयार करने के बाद इसे बेचने की चिंता नहीं होती। बाहरी व स्थानीय लोग धूम-धूम का मेंथा का तेल खरीद ले जाते हैं। इस फसल का सब से बड़ा लाभ है कि भुगतान तुरंत होता है। सुनील तिवारी, किसान

मेंथा फसल की फाइल फोटो।

मेंथा फसल की फाइल फोटो।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें