अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम शीरीन जैदी ने कौशाम्बी कोतवाली इलाके में आठ साल पहले युवक की हत्या कर शव यमुना नदी में फेंकने के दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी के एक साथी को दो साल की सजा व एक अन्य को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है।
अभियोजन के अनुसार कौशाम्बी कोतवाली के नरेंद्रबारा निवासी ललई यादव नौ फरवरी 2015 को घर से बारा ब्लॉक के बैंक जाने को बता कर गया था। देर रात तक वह घर वापस नहीं लौटा। ललई की खोजबीन करने जुटे परिजनों ने पुलिस को तहरीर दी।
एक सप्ताह बाद ललई का शव डेढावल स्थित यमुना घाट पर पानी में उतराता मिला। मृतक के शरीर में धारदार हथियार की कई चोटें थीं, और दाहिने हाथ का पंजा, बायां पैर और दाहिनी आंख गायब थी।
घटना के बावत मृतक के चचेरे भाई राम खेलावन यादव ने उरर्ई अशरफपुर निवासी सोनपाल लोध के खिलाफ अपहरण के बाद हत्या करके शव छिपाने का मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी ने बताया कि सोनपाल लोध ने उसके चचेरे भाई ललई को घर में एसबीआई की ब्रांच खुलवाने का लालच देकर पांच लाख रुपये लिए थे।था। रुपये वापस करने का दबाव बनाने पर ललई की हत्या कर दी गई।
घटना में सोनपाल, नेनुआ सलेमपुर निवासी हरिसिंह यादव व उरई अशरफपुर निवासी दिनेश मौर्य की संलिप्तता पाते हुए तीनों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे का परीक्षण अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात में किया गया। राज्य सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता शशांक खरे ने वादी मुकदमा समेत कुल 13 गवाहों को कोर्ट में बुलाकर कर गवाही कराई। बहस करते हुए एडीजीसी ने घटना को साबित बताया, और दोषियों को कठोर दंड देने का अनुरोध किया।
बचाव पक्ष की ओर से तमाम दलीलें पेश करके आरोपितों को संदेह का लाभ देकर दोष मुक्त किए जाने की अपील की गई। दोनों ओर से की गई बहस को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने ललई की हत्या कर शव छिपाने के लिए सोनपाल लोध को दोषी करार देकर उम्रकैद व 60 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
दिनेश मौर्य को घटना में प्रयुक्त चाकू रखने का दोषी करार देते हुए दो साल की कैद व पांच हजार रुपये के जुर्माना जमा करने की सजा दी। हरिसिंह को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।