तकरीबन डेढ़ बरस में कौशाम्बी, प्रभु श्रीराम को गंगा पार कराने वाले निषादराज के गांव श्रृंग्वेरपुर से सीधे जुड़ जाएगा। ऐसा राम वनगमन मार्ग पर बसेढ़ी के पास गंगा पर पुल बनने से संभव हो सकेगा। पीडब्ल्यूडी ने निर्माण के लिए नदी में मिट्टी की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
श्रीराम श्रृृंग्वेरपुर घाट से गंगा को पार करके कुरई घाट पहुंचे थे। श्रृंग्वेरपुर के निषादराज ने उन्हें नाव से नदी पार कराई थी। प्रयागराज के
श्रृृंग्वेरपुर और कौशाम्बी के कुरई घाट के बीच महज डेढ़ किमी की दूरी है, लेकिन यह सफर तय करने में तकरीबन 45 किमी का चक्कर काट कर प्रयागराज से आना-जाना पड़ता है।
अब अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक उस रास्ते पर फोरलेन हाईवे बन रहा है, जिस रास्ते से प्रभु श्रीराम वन को गए थे। ऐसे में कुरई घाट से करीब पांच किमी दूर स्थित बसेढ़ी में गंगा पर पुल का निर्माण कराया जा है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने नदी में मिट्टी की जांच शुरू करा दी है।
फरवरी तक काम शुरू हो जाएगा। इस पुल को तैयार होने में करीब डेढ़ बरस लगेंगे। इस पुल के बनने से कुरई घाट और श्रृृंग्वेरपुर के बीच की दूरी कम हो जाएगी। इसके अलावा सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ के लोगों को भी कौशाम्बी आने में सहूलियत होगी।
कुरई घाट पर नहीं हो सका निर्माण
बसेढ़ी के पास बन रहे पुल का निर्माण पहले कुरई घाट पर ही होना था, लेकिन यहां पर मिट्टी की कटान के कारण नदी के दोनों घाटों के बीच की दूरी काफी बढ़ गई थी। इसके अलावा अन्य कई तकनीकी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए पुल के निर्माण की जगह बदली गई।
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नहीं हुए चरण पादुका के दर्शन, लोग मायूस
कुरई के शंकरलाल निषाद, बेटू निषाद, कामता निषाद व बसेढ़ी के कृष्णपाल ने कहा, भरत चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लेकर इसी रास्ते से अयोध्या गए थे। चित्रकूट से निकली चरणपादुका यात्रा को भी इसी रास्ते से जाना चाहिए, लेकिन गंगा पर पुल न होने के कारण यात्रा इस रास्ते से नहीं गई। इससे गांव के लोग चरण पादुका के दर्शन से वंचित रह गए।
कुरई के पास गंगा पुल के निर्माण के लिए मिट्टी की जांच शुरू हो गई है। उम्मीद है फरवरी में काम शुरू हो जाएगा। पुल को तैयार होने में करीब डेढ़ वर्ष लगेंगे।
रवींद्र पाल
एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एनएच