गर्मी से अभी कम से कम तीन दिन और निजात मिलने वाली नहीं है। इसके बाद भी छुटकारा तभी मिलेगा, जब पछुआ हवाओं का दबाव कम हो। अगर, ऐसा नहीं हुआ तो उमस और चिलचिलाती धूप से और अधिक दिन भी जूझना पड़ सकता है।
गर्मी के तेवर नरम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। शनिवार को भी पारा 44 डिग्री के पार रहा। दिनभर लोग उमस से बेहाल रहे हैं। जिनके घर और दफ्तरों में एसी लगा था उन्हें तो सुकून था पर कूलर और पंखे वाले पूरे दिन पसीना ही पोछते रहे। फिलहाल इस मौसम से अभी राहत मिलने वाली नहीं है।
मौसम की जानकारी रखने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ.अजय सिंह बताते हैं कि कई दिनों से चल रहीं पछुआ हवाओं ने मानसून का रास्ता रोक रखा है। जब तक यह हवा चलती रहेगी, तब तक बारिश के आसार नहीं बनेंगे। हवा बंद होगी तभी बारिश के लिए माहौल बनेगा। आज मौसम में कुछ अंतर दिखा है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि 20 जून तक शायद बारिश हो जाए।
पूरे दिन घरों में कैद रहते बच्चे
नया नगर की रहने वाली सुमति सिंह का कहना है कि सुबह नौ बजे से ही चटख धूप होने लगती है। फिर शाम को सूरज ढलते तक राहत नहीं मिलती। हाल यह है कि बच्चे पूरे दिन घरों में ही कैद रहते हैं। सिराथू के कुलदीप त्रिवेदी ने बताया कि कूलर अब काम नहीं कर रहे हैं। जब तक एसी चलता है तब तक ठीक रहता है। आधे घंटे के लिए भी एसी बंद हो या कमरे से बाहर निकल आओ तो पूरा शरीर पसीने से भीग जाता है। संवाद
पिछड़ रही लंबी अवधि की धान की रोपाई
मंझनपुर। कृषि वैज्ञानिक डॉ.अजय सिंह का कहना है कि बारिश न होने की वजह से धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित लंबी अवधि की धान की फसल पर है। 140 से 150 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल की रोपाई का समय है। नर्सरी भी तैयार है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। मानसून के न आने के कारण यह फसल पिछड़ रही है।