मानसून के दिनों में भी कम बारिश और फसलों को बचाने के लिए नलकूपों से हो रहा अत्यधिक जलदोहन जलस्तर को गिरा रहा है। लघु सिंचाई विभाग के मुताबिक एक साल के अंदर ही चायल क्षेत्र में भू-गर्भ जलस्तर करीब 15 फीट नीचे चला गया है। कस्बों और गांवों में लगे इंडिया मार्का के हैंडपंप अब साथ छोड़ रहे हैं। गहरी बोरिंग वाले सबमर्सिबल पंपाें का ही सहारा बचा है। हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे।
बीते सालों में ठीकठाक बारिश हो जाती थी, जिससे धान के सीजन में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन, पिछले साल से मानसून भी साथ नहीं दे रहा है। नलकूपों के भरोसे काम चल रहा है। ऐसे में भू-गर्भ का जलदोहन बढ़ गया है। नतीजा, ब्लाॅक क्षेत्र का भू-गर्भ जलस्तर गिर गया है। पिछले साल जलस्तर 115 था तो इस बार 130 फीट पर आ गया है। कमालपुर गांव निवासी सोमदत्त मिश्रा, कमलेश कुमार ने बताया कि जलस्तर गिरने के कारण सरकारी हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। जलजीवन मिशन के ठेकेदार जो टैंकर मंगाते हैं, लोग उससे पानी भर रहे हैं। शानानीबी के गुडाई पांडेय व कौशल कुमार ने बताया कि चौराडीह, चलौली, सिंहपुर, पहाड़पुर, सुधवर समेत इलाके के अन्य गांवों में भी यही हाल है। गहरी बोरिंग वाले निजी सबमर्सिबल पंप ही चल रहे हैं। जलालपुर शाना के प्रधान द्वारिका प्रसाद ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर 18 हैंडपंपो में 10-10 फीट पाइप डलवाया जा चुका है। चौराडीह के पंचायत सचिव अरविंद सिंह ने बताया कि हैंडपंपों के पानी छोड़ने की समस्या एकाएक बढ़ गई है।
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डार्कजोन में जाने का फिर बढ़ा खतरा
वर्ष 2016 में केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने चायल ब्लाॅक को डार्क जोन घोषित किया था। इलाके में गहरी बोरिंग पर रोक लगा दी गई थी। वर्ष 2018-19 में मनरेगा योजना के तहत जलशक्ति अभियान शुरू हुआ। क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में तालाब और पोखर की खुदाई, पौधारोपण, सोकपिट निर्माण कर वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जलश्रोतों के साथ-साथ रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया गया। तब कहीं साल 2022 में ब्लॉक डार्क जोन से बाहर आया। वहीं, संकट फिर मंडराने लगा है।
ग्राम पंचायत जलालपुर शाना की आबादी करीब साढ़े पांच हजार हैं। पेयजल के लिए गांव में करीब 155 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। भूजल स्तर गिरने से तकरीबन आधे हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।
नन्हे तिवारी, जलालपुर शाना
सुधवर गांव के नेतारा मोहल्ले में करीब 100 घरों की दलित बस्ती है। यहां चार सरकारी और दो निजी हैंडपंप हैं। इनमें से तीन खराब है। जो एक निजी हैंडपंप चलता भी है तो उससे सबको पानी भरने नहीं दिया जाता।
बुधराम, नेतारा सुधवर
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इन दिनों धान रोपाई के लिए किसान भूजल का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं। घरों में लगे निजी सबमर्सिबल से भी पानी की अत्यधिक बर्बादी हो रही है। पिछले कई वर्षो से बारिश भी कम हो रही है। इससे भूजल स्तर में 15 फीट की गिरावट आई है।
रमाकांत सिंह, अवर अभियंता, लघु सिंचाई, चायल
जलालपुर शाना के रहौनी गांव में हैंडपंप से पानी भरने के लिए इंतजार में खड़ी महिलाएं। संवाद
जलालपुर शाना के रहौनी गांव में हैंडपंप से पानी भरने के लिए इंतजार में खड़ी महिलाएं। संवाद