मंझनपुर । महेवाघाट कोतवाली इलाके में दुष्कर्म पीड़िता की हत्या के 11 दिन बाद एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने थानाध्यक्ष से लेकर बीट के सिपाही तक को लाइन हाजिर कर दिया। एडीजी भानु भाष्कर ने एएसपी फतेहपुर व आईजी चंद्रप्रकाश को मामले की जांच सौंपी थी।
दो साल पहले दुष्कर्म की शिकार युवती ने जब मुकदमा दर्ज कराया था कि आरोपी पवन निषाद को जेल भेज दिया गया था। इस बार नवरात्र में जब वह जमानत पर छूट कर आया तो अपने भाई अशोक निषाद के साथ युवती पर सुलह करने का दबाव बनाने लगा था। सुलह न करने पर 20 नवंबर को अशोक अपने भाइयों के साथ मिलकर दुष्कर्म पीड़िता की कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी थी।
घटना का खास पहलू यह रहा कि पीड़िता की हत्या तब की गई, जब वह कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ जान से मार देने की धमकी देने की शिकायत करके घर लौट रही थी।
घटना वाली रात ही एडीजी भानु भाष्कर व आईजी चंद्रप्रकाश मौके पर पहुंचे। एडीजी ने पुलिस कर्मियों की लापरवाही की जांच एएसपी फतेहपुर विजय शंकर मिश्रा व पर्वेक्षण अधिकारी की जांच आईजी को सौंपी।
एएसपी फतेहपुर की जांच रिपोर्ट के बाद शुक्रवार रात एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने महेवाघाट के थानाध्यक्ष रजनीकांत राजपूत, हलका प्रभारी एसआई नंदू यादव, बीट सिपाही अरविंद कुमार व महिला हेल्प डेस्क में रही आरक्षी ज्योत्सना यादव को लाइन हाजिर कर दिया है। अब आईजी चंद्रप्रकाश की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सवा माह में तीन बार की गई थी शिकायत
मृतका की भाभी के अनुसार जान से मारने की धमकी देने व मुकदमे में सुलह का दबाव बनाए जाने को लेकर पुलिस से तीन बार शिकायत की गई। इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।