मासूम की मौत के बाद शव को बाहर निकाल दिया गया। रामलाल तीन घंटे तक बेटे का शव गोद में लिए इधर-उधर भटकता रहा। कई मर्तबा उसने जिला अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की मांग की, लेकिन टालमटोल किया गया। खबर मिलने पर मीडियाकर्मी पहुंचे तो रामलाल को नई बिल्डिंग की ओर से बुलाया गया। करीब दो सौ मीटर दूर बुलाकर उसको शव वाहन में बैठाकर चित्रकूट ले जाया गया।
दीपांशु की मौत के बाद पिता रामलाल बिलख रहे थे। रामलाल जिला अस्पताल में चीख-चीख कर कह रहे थे कि जब तक तीन हजार रुपये नहीं दिए तब तक ऑपरेशन नहीं किया गया। इसके बाद देखरेख में लापरवाही की गई। जिससे उसके बेटे की जान चली गई। मामले में सीएमएस डॉ. दीपक सेठ ने मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं सीएमओ डॉ सुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि मामला गंभीर है। सीएमएस से रिपोर्ट तलब कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।