सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कनैली में पेट दर्द और मुंह के छाले में इस्तेमाल होने वाली सामान्य दवाएं भी बाहर की लिखी जा रही हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी पर्चे के साथ एक छोटी पर्ची पकड़ा दी जाती है। बाहर से दवा खरीदना मजबूरी है।
खास यह है कि क्षय रोग, जिस पर भारत सरकार विशेष सुविधा दे रखी है, उसकी भी दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ता है। मंगलवार के जाठी से आए दयाशंकर ने बताया कि मुंह के छाले व बदन में दर्द की समस्या है।
सरकारी पर्चा भी बनवाया था। डॉक्टर ने इस पर्चे में दवा लिखी ही। इसके साथ एक छोटी पर्ची भी दी, जिसमें लिखी दवा बाहर से 150 में खरीदनी पड़ी।
पेट दर्द से परेशान जाठी की सरिता देवी को भी 300 रुपये की दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ी। उनका कहना कि बाहर की दवाएं बड़ी महंगी पड़ती हैं। डॉक्टर को बताया लेकिन छोटी पर्ची थमा ही दी गई।
करीब पांच किमी दूर रक्सराई से आईं सुरमीता ने बताया कि पेट में दर्द है और सर्दी लगी है। सीएचसी में दिखाया तो कुछ दवाएं अंदर से मिली। इसके अलावा 400 रुपये की दवा बाहर से भी खरीदनी पड़ी।
जोड़ों में दर्द रहता है। काफी दिनों से सीएचसी में इलाज करा रहा हूं। अंदर की कुछ दवाओं के साथ हर बार 100-200 रुपये की दवा बाहर की भी लिख दी जाती है। यह दवाएं सिर्फ चुनिंदा मेडिकल स्टोर में ही मिलती है।
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दशरथ लाल, ढोकसहा
पत्नी क्षय रोग से पीड़ित है। सीएचसी में काफी दिनों से इलाज करा रहा हूं लेकिन यहां भी हर बार 400 से 500 की दवा बाहर से ही खरीदनी पड़ती है। गरीबी की बात कहो तो डॉक्टर कहते हैं प्राइवेट में दिखा लो।
- विजय मिश्रा, रक्सराई
सीएचसी के चिकित्सकों द्वारा बाहर की दवाएं लिखना गलत है। अगर, ऐसे किसी चिकित्सक की जानकारी हो या उनकी लिखी पर्ची हो तो उपलब्ध कराएं। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सुष्पेंद्र कुमार, सीएमओ
कनैली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
कनैली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद