पितृपक्ष में जहां अपनों को तर्पण देकर याद किया जाता है। वहीं, भवंसुरी के धर्मराज का अपनों ने ही अपमान कर घर से निकाल दिया। अब धर्मराज का सहारा वृद्धाश्रम बना है।
सरसवां ब्लॉक के भवंसुरी निवासी धर्मराज की उम्र 60 साल से अधिक है। धर्मराज की पत्नी का निधन हो चुका है। बताया कि परिवार में बेटा कमलेश के साथ ही बहू और नाती गुड्डू है। परिवार की आर्थिक हालत बेहतर नहीं है। ऐसे में बेटा मजदूरी करता है। वह घर पर रहकर पूजा-पाठ करते थे। अब उनका घर में ख्याल रखने वाला कोई नहीं है।
धर्मराज के मुताबिक तीन दिन पहले बहू-बेटे ने उन्हें घर से निकाल दिया। बताया कि एक समय था कि वह मेहनत मजदूरी कर पूरे परिवार का पालन करते थे। अब उनका कोई सहारा नहीं है, इसलिए अपनों के रहते हुए भी वह वृद्धाश्रम में रहते हैं।