सोरयसिस से ग्रसित त्वचा और उसमें लालिमा, एड़ी से लेकर चोटी तक शरीर में जलन से गुलाब सिंह आजिज आ चुके थे। आत्महत्या की तैयारी कर ली थी। किसी तरह बच गए। लेकिन योग के एक कार्यक्रम ने इनका जीवन बदल दिया। छह माह के नियमित अभ्यास से आज गुलाब सिंह पूरी तरह स्वस्थ हैं। अब वह जिले भर में योग का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
मंझनपुर कस्बे से सटे टेवां (उमरा) निवासी गुलाब सिंह वर्तमान में पतंजलि योग पीठ के जिलाध्यक्ष हैं। 2004-05 में गुलाब सिंह सोरयसिस से ग्रसित हो गए थे। गुलाब सिंह बताते हैं कि उपचार के बाद भी लाभ नहीं मिला। 2009 में शरीर में जलन और शरीर की दशा देखकर इनके मन में आत्महत्या का ख्याल आया।
एक दिन इन्होंने आत्महत्या की पूरी तैयारी कर ली। जिस कमरे में इन्हें घटना को अंजाम देना था। वहां बार-बार पत्नी (स्व.) कैरी देवी का आना-जाना लगा रहा। ऐसे में इन्हें मौका नहीं मिला।
थक-हारकर गुलाब सिंह ने वहां रखे टेलीविजन को चालू कर लिया। देखा तो बाबा रामदेव सोरायसिस से ग्रसित लोगों को बीमारी निजात दिलाने का तरीका बता रहे थे। गुलाब सिंह ने देखा कि बाबा रामदेव प्राणायाम के माध्यम से सोरायसिस दूर होने की बात कर रहे थे। बस यहीं से उनका इरादा बदल गया।
नियमित अभ्यास से दूर हो गई बीमारी
गुलाब सिंह ने बताया कि सोरायसिस को प्राणायाम से ठीक किए जाने की जानकारी के बाद योग का अभ्यास शुरू कर दिया। सुबह ढाई घंटे और शाम को खाने से पहले डेढ़ घंटा योग का अभ्यास किया। करीब पांच माह के नियमित अभ्यास से बीमारी ठीक हो गई। बीमारी से निजात के बाद गुलाब सिंह बाबा रामदेव से मिलने हरिद्वार गए। वहां इनके योग के लगाव को देखते हुए बाबा रामदेव ने गुलाब सिंह को पंतजलि योग पीठ के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी। तब से गुलाब लगातार जिले में घूम-घूम कर योग का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।