कड़ा। वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन शनिवार को जहां घरों में मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना हुई। वहीं घर में पूजन के साथ ही श्रद्धालओं ने मां के दरबार में भी हाजिरी लगाई। परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। 51 वीं शक्तिपीठ शीतलाधाम कड़ा स्थित मां की दरबार में माथा टेकने के लिए श्रद्धालओं की भारी भीड़ जुटी।
चैत्र नवरात्र के चौथे दिन देवी के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि देवी भगवती के कूष्मांडा स्वरूप ने अपनी मंद मुस्कुराहट से ही सृष्टि की रचना की थी। इसलिए देवी कुष्मांडा को सृष्टि की आदि स्वरूपा माना गया है। देवी कुष्मांडा को समर्पित इस दिन का संबंध हरे रंग से जाना जाता है। माता रानी की आठ भुजाएं हैं। जिसमें से सात में उन्होंने कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत का कलश, चक्र, और गदा लिया हुआ है।
माता के आठवें हाथ में जप माला है और मां सिंह के वाहन पर सवार हैं। इनकी पूजा से भक्तों के रोगों का नाश होता है और आयु, यश, बल व आरोग्य की प्राप्ति होती है। इन्हीं मान्यताओं को लेकर वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन भक्तों ने मां भगवती के कूष्मांडा स्वरूप की उपासना पूरी आस्था और विश्वास के साथ की। धूप, दीप, नैवेद्य की सुगंध से जिले भर का माहौल भक्तिमय बना रहा। 51 शक्तिपीठों में शुमार कड़ा धाम स्थित मां शीतला की दरबार में जनपद के अलावा आसपास के विभिन्न जिलों से भक्तों की भारी भीड़ जुटी।
सुबह से ही कड़ा के कुबरी, कालेश्वर, बाजार, हनुमान आदि घाटों पर गंगा स्नान कर हाथों में नारियल, चुनरी, मिठाई, हलवा, पूडी़ आदि लेकर मां की दरबार पहुंचे। श्रद्धालओं ने मां शीतला का दर्शन कर पूजा अर्चना की और परिवार के सुख-समृद्धि एवं शांति के लिए मनोकामना की। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा। इसी तरह मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, पश्चिमशरीरा के झारखंडी मंदिर, अढ़ौली समेत विभिन्न कस्बों, बाजारों में स्थित देवी मंदिरों में शनिवार सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई। भक्तों ने विधि विधान के साथ माता भगवती के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना की।