महेवाघाट थाना क्षेत्र के हिनौता गांव की एक महिला की बृहस्पतिवार रात हत्या कर दी गई। महिला का शव खेत में फेंक दिया गया। सुबह जानकारी होने पर हंगामा मच गया। शव फेंके जाने का स्थान फतेहपुर जिले के धाता थाना क्षेत्र में पड़ता है। ऐसे में काफी देर तक महेवाघाट और धाता पुलिस के बीच मामला सीमा विवाद में फंसा रहा। करीब चार घंटे बाद महेवाघाट थाने की पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। महेवाघाट पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। फौरी तौर पर पुलिस को जांच में पता चला है कि घटना महुआ बीनने के विवाद में झगड़े को लेकर हुई है।
कौशाम्बी के महेवाघाट थाना क्षेत्र स्थित हिनौता गांव के पास से फतेहपुर के धाता थाना क्षेत्र की शुरूआत होती है। हिनौता के पूर्व प्रधान संजय सिंह का खेत धाता क्षेत्र में है।
शुक्रवार सुबह धाता थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव के पास पूर्व प्रधान संजय सिंह के खेत में एक महिला का शव मिला। कुछ देर में वहां सैकड़ों की भीड़ लग गई। लोगों ने शव की शिनाख्त हिनौता की रहने वाली उजरिया देवी पत्नी श्यामलाल के रूप में की। जानकारी होने पर उसके परिजन रोते बिलखते वहां पहुंचे। शव के पास एक डंडा पड़ा था। अंदेशा है कि महिला का गला डंडे से घोंटा गया है। शरीर पर चोट के भी निशान पाए गए है। सूचना पर महेवा घाट पुलिस पहुंची। सीमा विवाद होने पर एसपी कौशाम्बी ने एसपी फतेहपुर को मामले की जानकारी दी। इसके बाद धाता पुलिस पहुंची। मगर वहां की पुलिस ने शव कब्जे में लेने से इंकार कर दिया।
कहा जा रहा है कि 28 अप्रैल को हिनौता की रहने वाली उजरिया और गांव के गुलाब सिंह की पत्नी के बीच महुआ बीनने के विवाद में झगड़ा हुआ था। आरोप है कि उजरिया और उसके पति श्यामलाल ने मिलकर गुलाब की पत्नी को पीटा था। मामले में पुलिस ने श्यामलाल का धारा 151 में चालान किया था। जिससे दोनों पक्षों में तनातनी थी। पति श्याम लाल ने पत्नी की हत्या के आरोप में गुलाब सिंह, उसके बेटे अशोक, अभिषेक और आलोक के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया है।
गांववालों की मानें तो तो बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे उजरिया के घर से लड़ने-झगड़ने की आवाज आ रही थी। कुछ देर बाद हिनौता पुलिस चौकी से सिपाही पहुंचे। इसके बाद मामला ठंडा हो गया। वहीं उजरिया की बेटी नेहा(15) की मानें तो करीब नौ बजे चार लोग आए और उसकी मां को उठा ले गए। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब सिपाही पहुंचे थे तो फिर उन्होंने क्या कार्रवाई की।
गांव वालों की मानें तो महुआ बीनने के विवाद में झगड़े के बाद कई दिन से उजरिया कह रही थी कि वो लोग उसे मार डालेंगे। आखिरकार उसे मार ही डाला गया। ऐसे में बच्चे नेहा, इंद्रजीत और गोलू का रो-रोकर बुरा हाल है। पति श्यामलाल मजदूरी करता है। पत्नी की हत्या से उसका भी हाल बेहाल है।