मौसम की मार से रविवार को कौशाम्बी के एक और अन्नदाता की मौत हो गई। मड़ाई में अनाज नहीं निकलने के सदमे में चायल तहसील के बलियावां देह गांव के राजेंद्र कुमार पटेल (45) ने खुदकुशी कर ली। घर के भीतर कोठरी में उसकी लाश फंदे से लटकती देख घरवालों के होश उड़ गए। चीख-पुकार पर गांववालों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने जांच के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। किसान के खुदकुशी की खबर लगते ही मौके पर राजस्व निरीक्षक और लेखपाल भी पहुंचे। राजस्व निरीक्षक ने बताया कि किसान की मौत की हकीकत खंगाली जा रही है।
बेमौसम बारिश में गिरकर ज्यादातर किसानों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई हैं। बर्बादी का आलम यह है कि मड़ाई में 10 कुंतल के स्थान पर 1 कुंतल भी अनाज निकलना मुश्किल हुआ है। कम पैदावार का सदमा किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इस गम में जिले के किसानों ने अब खुदकुशी भी करनी शुरू कर दी है। रविवार को ही फसल बर्बाद होने के ऐसे ही सदमे में चायल तहसील क्षेत्र के बलियावां देह गांव के किसान राजेंद्र पटेल ने भी फंदे से लटककर जान दे दी है। उसकी पत्नी कमला देवी ने बताया कि उसके पास 10 विस्वा खेत है। 10 विस्वा खेत बंटाई पर लेकर भी गेहूं की बुआई की थी। मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश में गिरकर पूरी फसल बर्बाद हो गई थी।
रही सही कसर इस महीने हुई मूसलाधार बरसात ने पूरी कर दी। धूप होने के बाद किसी तरह से फसल को समेटकर शनिवार की रात मड़ाई कराई गई। बताया कि मड़ाई में इतना भी अनाज नहीं मिला है, जिससे महीने भर की रोटी का इंतजाम हो सके। विवाहिता की मानें तो अनाज के स्थान पर भूसा ही भूसा निकलते देख उसके पति परेशान हो गए थे। रातभर वह सदमे में रहे। सुबह उठकर खलिहान की ओर गए थे। वहां से लौटते ही रस्सी के फंदे से घर के भीतर लटककर जान दे दी। कमला देवी की मानें तो फसल तबाह होने के गम में ही उनके पति ने खुदकुशी की है।