बेखौफ हत्यारे पुलिस के इकबाल को चुनौती दे रहे हैं। एक महीने के भीतर सात हत्याएं हुईं। इनमें से चार का कत्ल घर के बाहर दरवाजे पर हुआ। अपनों के बीच सो रहे लोगों को मौत की नींद सुलाने के बाद हत्यारे भागने में कामयाब रहे। ताबड़तोड़ हो रही इन घटनाओं से पुलिस की नींद उड़ गई है।
कोखराज के बघेलापुर निवासी मुंशीलाल (55) की 11 सितंबर को बाग में उसकी झोपड़ी के बाहर हत्या की गई थी। गला रेतकर मुंशीलाल को मौत के घाट उतारा गया था। यहां से शुरू हुआ मौत का खूनी खेल बदस्तूर जारी है। इसके बाद ताबड़तोड़ हत्याएं हुईं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली घटना सरायअकिल के मेड़वासलेमपुर में रमेश(28), कोखराज थाना के समीप सियाराम (55) और चरवा के जीत का पुरवा निवासी इंद्रपाल यादव (55) के साथ हुई।
यह सभी लोग अपने-अपने घरों के सामने मारे गए। सियाराम परिजनों के साथ घर के बाहर सो रहा था, हत्यारों ने गला घोंट कर मार डाला। यही रमेश के साथ हुआ। रमेश की परिजनों की मौजूदगी में गोली मारकर हत्या हुई, लेकिन बगल में सो रही पत्नी कुलिया व भाई सुरेश को भनक तक नहीं लगी। रमेश व सियाराम के हत्यारों की तलाश पुलिस कर रही है। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि सोमवार की रात जीत का पुरवा में घर के बाहर सो रहे इंद्रपाल यादव की कनपटी में तमंचा सटाकर गोली मारकर हत्यारे भाग निकले। इंद्रपाल को मारा क्यों गया इसकी अब तक वजह ही नहीं साफ हो सकी है। इनके अलावा कई अन्य हत्याएं कौशाम्बी में हुई जो पुलिस के लिए अब तक पहेली है।