अपनी हैवानियत छिपाने के लिए सरजू ने गांव वालों के बीच खौफ का ताना-बाना बुन रखा था। गांव वालों को डराने के लिए उसने अफवाह फैला रखी थी कि उसकी पत्नी शशिकला व बेटी कंचन लता पर ब्रह्मराक्षस सवार है। इसी राक्षस के खौफ से गांव वाले उसके घर की ओर न जाते थे, न ही आंख उठाकर देखते थे। वहीं घर के भीतर कैद मां-बेटी के खुद सरजू जल्लाद बना हुआ था। ऐसी-ऐसी वह यातनाएं दे रहा था, जिसे सुनकर लोगों की आंख भर आई थी।
सरजू तिवारी के बड़े बेटे आलोक की दस साल पहले मौत हो चुकी थी। वह बीमार था। शशिकला पढ़ी-लिखी महिला थी। छोटे बेटे की तबियत खराब होने पर वह उसका इलाज अस्पताल में कराना चाहती थी, लेकिन सरजू तिवारी इसके लिए तैयार नहीं था। यहीं से दोनों के बीच खटास पैदा होने लगी थी। सरजू के ससुराली भी इसका विरोध कर रहे थे। वह बेटे को लेकर अपने ससुराल चली गई थी, लेकिन जिद्दी व सनकी सरजू उसे जबरन घर बुला लाया था। इसके बाद छोटा बेटा गायब हो गया। गांव वालों का कहना है कि वह पिता के खौफ से भाग निकला था। बेटे के गायब होने के बाद से ही सरजू ने गांव में अफवाह फैलाना शुरू कर दिया था कि शशिकला व उसकी बेटी कंचन लता पर राक्षस का साया है। वह जान मांग रहा है। यह राक्षस किसी न किसी जान लेकर रहेगा। इसके बाद वह तमाम तरह की अफवाहें फैलाता रहता। खुद की जान खतरे में बताकर वह लोगों को डराता था। यह बात गांव वालों के दिल में घर कर गई कि शशिकला व कंचन लता पर राक्षस का साया है, नतीजतन लोगों ने सरजू के घर की ओर झांकना ही बंद कर दिया। इसके बाद सरजू ने दोनों को घर आठ साल पहले कैद किया तो दोबारा निकलने नहीं दिया। गांव वाले राक्षस से डरते थे और परिवार वाले सरजू से। छोटे-छोटे बच्चों को सरजू के घर की इर्द-गिर्द भी नहीं फटकने दिया जाता था।
मां-बेटी के लिए इलाज के लिए चाहिए स्पेशल डॉक्टर
शशिकला व उसकी बेटी कंचन लता के इलाज के लिए एक स्पेशल डॉक्टर की आवश्यकता है। पौष्टिक आहार न मिलने की वजह से दोनों सूख कर कंकाल हो चुकी हैं। जिला अस्पताल में इलाज शुरू हो गया है, लेकिन इन्हें बेहतर इलाज की जरूरत है। सीएमएस ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक की जरूरत है। इसके लिए वह सीएमओ से बातचीत करेंगे।